बिलासपुर। पेंट्रीकार के कर्मचारी खाना या नाश्ते में अब तय रेट से अधिक की वसूली नहीं कर सकेंगे। साथ ही उन्हें यात्रियों को बिल भी देना होगा। बिल नहीं देने की शिकायत पर यात्री को परोसा गया भोजन मुफ्त हो जाएगा। कर्मचारी को पूरी राशि लौटानी पड़ेगी। यह आदेश रेलवे बोर्ड का है। यात्रियों तक इसकी जानकारी देने मंगलवार को आईआरसीटीसी के कर्मचारी ट्रेनों में स्टीकर चस्पा करते रहे।


सफर के दौरान पेंट्रीकार में खाना या नाश्ता आर्डर करने पर यात्री का जो भी बिल है उसकी रसीद देनी है ताकि यात्री संतुष्ट हो सके कि कर्मचारियों ने निर्धारित रेट ही लिया है। प्रत्येक यात्रियों को बिल देने का नियम पहले से है। लेकिन अधिकांश ट्रेनों की पेंट्रीकार में इसका पालन नहीं हो रहा है।


अधिक राशि वसूलने के चक्कर में कर्मचारी बिल देने से इन्कार कर देते हैं। लगातार आ रही शिकायतों को लेकर रेलवे बोर्ड अब सख्त हो गया है। इसकी सूचना हर एक यात्रियों तक पहुंचने के लिए हर कोच में स्टीकर लगाने का निर्णय लिया है। साथ ही सभी आइआरसीटीसी के एरिया मैनेजर कार्यालयों को स्टीकर भेजा गया है।


लिगल एंड कैटरिंग सर्विसेस के जीजीएम ने अनिवार्य रूप से सभी ट्रेनों के हर कोच में इसे चस्पा करने कहा है। इस आदेश का पालन करते हुए यात्री स्टीकर चस्पा करने में जुटे हुए हैं। इसके तहत पहले चेन्नई एक्सप्रेस में और मंगलवार को छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में चस्पा किए गए। मुख्यालय का आदेश है कि हर कोच के सुरक्षित स्थान पर कम से कम दो स्टीकर चस्पा किया जाए।


स्टीकर में इन भाषाओं में जानकारी


ट्रेन में अलग- अलग राज्य के यात्री सफर करते हैं। उनके क्षेत्रीय भाषाओं में रेलवे की इस नई योजना की जानकारी देने के लिए स्टीकर को तैयार किया गया है। इसमें चार भाषा तेलगू , उड़िया, हिंदी व अंग्रेजी में बिल नहीं दिया तो खाना होगा मुफ्त लिखा हुआ है।


जोन की सात ट्रेनों के अलावा सभी भी करेंगे चस्पा


दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन से छूटने वाली सात ट्रेनों की पेंट्रीकार की जिम्मेदारी आइआरसीटीसी के पास है। पहले चरण में इन के कोचों में स्टीकर चस्पा किए जा रहे हैं। इसके बाद जोन से गुजरने वाली ट्रेनों में भी इसे लगाया जाएगा।


खासतौर पर स्टीकर तैयार किए गए


आइआरसीटीसी ने खासतौर पर स्टीकर तैयार किया है। उनका दावा है कि ट्रेन की धुलाई के दौरान भी पानी का इस पर असर नहीं होगा और न उससे यह खराब होंगे। यही वजह है कि मुख्यालय से आवश्यकतानुसार सभी को स्टीकर उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें बिलासपुर को 500 स्टीकर, सिंकदराबाद को 900, विजयवाड़ा को 300, भुवनेश्वर को 1100 स्टीकर का स्टॉक भेजा गया है।