2019 लोकसभा चुनावों के लिए बेंगलुरु में विपक्षी गठबंधन का जो बीज पड़ा था, उसके अंकुर निकलने शुरू हो गये हैं। पहली बार उत्तर प्रदेश से बाहर बहुजन समाज पार्टी किसी दूसरे राज्य में सरकार में शामिल होने जा रही है।

बुधवार को बेंगलुरु में होने वाले कुमारस्वामी सरकार के मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण में बसपा के एकमात्र विधायक एन महेश भी मंत्रिपद की शपथ लेंगे। बसपा अध्यक्ष मायावती ने इसकी सहमति दे दी हैं और इस मौके पर मायावती का प्रतिनिधित्व करने के लिए बसपा महासचिव सतीश मिश्र भी शपथ समारोह में शामिल होंगे।


सरकार में बसपा के शामिल होने के बाद कर्नाटक में अब जद (एस)-कांग्रेस-बसपा गठबंधन सरकार बनेगी। कर्नाटक का यह प्रयोग बसपा और कांग्रेस के बीच भी उत्तर प्रदेश के बाहर भी सहमति और समझौते का रास्ता खोलेगा।


यह जानकारी देते हुए जनता दल (एस) के महासचिव और कर्नाटक में गठबंधन सरकार की समन्वय समिति के संयोजक कुंवर दानिश अली ने अमर उजाला को बताया कि कर्नाटक विधानसभा चुनावों में जद (एस) और बसपा के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन था और बसपा के एक विधायक एन महेश चुनाव जीते हैं।


जद (एस) और कांग्रेस के बीच मंत्री पदों के बंटवारे के बाद जद (एस) ने गठबंधन धर्म का पालन करते हुए अपने कोटे से एक मंत्री पद बसपा को देने का फैसला किया। इसके लिए मुख्यमंत्री कुमारस्वामी और दानिश अली ने मायावती से बात करके उन्हें राजी किया।


उत्तर प्रदेश के बाहर राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, पंजाब, दिल्ली, बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में बसपा ने विधानसभा और लोकसभा चुनावों में कई बार बेहतर प्रदर्शन करते हुए कुछ राज्यों में लोकसभा और विधानसभा की कुछ सीटें भी जीती हैं।


लेकिन बसपा ने मौका पड़ने पर कांग्रेस या गैर भाजपा सरकारों को समर्थन देकर मदद तो की है, लेकिन बसपा किसी सरकार में शामिल नहीं हुई। कई बार उसके विधायक सत्ता के लालच में टूटे भी, लेकिन मायावती ने कभी किसी को उत्तर प्रदेश के बाहर मंत्री बनने की हरी झंडी नहीं दी। लेकिन पहली बार कर्नाटक में मायावती ने यह पहल की है।

2019 में होने वाले आम चुनावों में कांग्रेस और बसपा, भाजपा को रोकने के लिए एक साथ आ सकते हैं

बताया जाता है कि चुनाव से पहले बसपा के साथ जद (एस) के गठबंधन के सूत्रधार दानिश अली जो जद (एस) अध्यक्ष एचडी देवेगौड़ा और मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के बेहद भरोसेमंद हैं, ने ही कांग्रेस के साथ भी जद (एस) का गठबधन कराने में अहम भूमिका निभाई।


नतीजे आने से पहले ही दानिश अली कांग्रेस नेताओं गुलाम नबी आजाद, अशोक गहलोत, अहमद पटेल के संपर्क में आ गए थे। राहुल गांधी के भरोसेमंद सूत्रों के साथ भी उनकी चुनाव के दौरान ही बातचीत हो गई थी। अब एक बार बसपा को सरकार में शामिल कराने की पहल भी दानिश अली ने ही की है।


रणनीति यह है कि कर्नाटक में सरकार में शामिल होने के बाद बसपा का जद (एस) और कांग्रेस के साथ सियासी रिश्ता और मजबूत हो जाएगा। इससे दोनों दलों के बीच निकटता बढेगी और उत्तर प्रदेश के बाहर अन्य राज्यों में बसपा और कांग्रेस की दोस्ती का रास्ता भी तैयार होगा।


इसका पहला प्रयोग अक्टूबर नवंबर में होने वाले मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में होगा। जहां कांग्रेस बसपा को कुछ सीटें देकर इन राज्यों में उसके दलित और अति पिछड़े वोट बैंक को अपने साथ जोड़ सकेगी। 


अगर यह प्रयोग सफल रहा तो 2019 में लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश के भीतर कांग्रेस-सपा-बसपा महागठबंधन का हिस्सा बनेगी और अन्य कुछ राज्यों में भी बसपा कांग्रेस के बीच सीटों का तालमेल हो सकता है। कुल मिलाकर बेंगलुरु में सोनिया गांधी और मायावती के बीच जो स्नेह मिलन मंच पर दिखाई दिया था, उसके अब सियासी नतीजों में बदलने की शुरुआत हो गई है।