जिस घर में दरिद्रता का वास हो जाता है, वहां कभी कोई खुशी नहीं टिक पाती। दरअसल दरिद्रता को शास्त्रों में धन की देवी लक्ष्मी की बहन अलक्ष्मी कहा गया है। जिसका स्वभाव अपनी बहन के बिल्कुल विपरित है। जहां महालक्ष्मी के घर में आने से श्री और सौभाग्य जाग जाता है, वहीं अलक्ष्मी के पैर पसारने से दुख, गृह कलेश और गरीबी हावी होने लगती है। घर के मेन गेट से ही लक्ष्मी और अलक्ष्मी का प्रवेश होता है। यदि वहीं पर कुछ चीज़े रख दी जाएं तो अलक्ष्मी घर में प्रवेश नहीं कर पाएगी।

प्रकृति को घर में स्थान देना सेहत और मूड दोनों के लिए अच्छा होता है। घर के मुख्य द्वार के आसपास फूलों की सुंदर फुलवारी सजाएं, जिसकी खुशबू से सकारात्मकता वातावरण का संचार होगा। हर रोज ताज़े फूल भगवान को अर्पित करें, कांच के फूलदान में इन्हें घर में भी सजाया जा सकता है। 

घर में पॉजिटिव वाइब्स के लिए मेन गेट पर बिल्व पत्र, अशोक, आम या पीपल के पत्तों से वंदनवार सजाएं। संभव न हो तो रंग-बिरंगे फूलों की माला भी सजाई जा सकती है।

जहां खुशबू होती है, वहां सकारात्मक ऊर्जा माहौल को खुशनुमा बना देती है। घर में सुबह-शाम अगरबत्ती जलाएं, खुशबू वाली कैंडल्स, एयर फ्रैशन आदि से घर में बरकत बनी रहती है। 

सुबह उठकर घर के सभी खिड़कियां और दरवाज़े खोल दें। चहचहाती चिड़ियों की मधुर ध्वनि से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा आती है। सूरज की किरणें तन और मन के लिए टॉनिक का काम करती हैं।

सुख-समृद्धि के लिए मुख्यद्वार पर लक्ष्मी जी और कुबेर देव की फोटो लगाएं, स्वस्तिक और शुभ-लाभ को लाल सिंदूर से बनाएं।