मिसेज़ एशिया नार्थ अमेरिका ख़िताब पर लगातार दो वर्षों से इंदौर को मिल रही कामयाबी

इस साल वर्षा चौहान और पिछले साल कंचन फरक्या ने ताज पर किया था क़ब्ज़ा 


इंदौर  कीर्ति राणा  मिसेज़ एशिया नार्थ अमेरिका का ख़िताब जीत चुकीं वर्षा चौहान (2017-18) और कंचन फरक्या (2016-17)  की इस उपलब्धि की जानकारी मप्र के सीएम शिवराज सिंह तक पहुँची नहीं वरना कब से ही बधाई के ट्विट का ताँता लग जाता।विश्व में मप्र की उपलब्धियों का लेखाजोखा रखने वाले विभागों की भी यह उदासीनता ही है।महिला सशक्तिकरण के दावे करने वाली शिवराज सरकार को ही इन बेटियों के सम्मान की फ़िक्र नहीं है तो फिर इंदौर की इन बेटियों के प्रति लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से लेकर महापौर मालिनी गौड़ भी क्यों उदारता दिखाएँ  । 

अमेरिका के लासवेगास शहर में संपन्न हुई मिसेज़ साउथ एशिया स्पर्धा में मिसेज़ नार्थ एशिया अमेरिका का ख़िताब जीतीं वर्षा चौहान इंदौर विजयनगर में अपने मायने आई हुई हैं। आयबी में पदस्थ रहे (स्व) राजेंद्र सिंह कुशवाह की पुत्री वर्षा फ़ख़्र से कहती हैं माँ रत्ना कुशवाह ने हर कदम पर मेरा हौंसला बढ़ाया, पति जटाशंकर सिंह चौहान (बीएसफ असम में पदस्थ) ने ऐसी तमाम स्पर्धाओं में भाग लेने के लिए उत्साहित नहीं किया होता तो   दो बच्चों की माँ के लिए सफलता के इस मुक़ाम पर पहुँचना असंभव ही था। 

ऐसे मिली सफलता


दिल्ली के किंगडम ऑफ़ ड्रीम में संपन्न हुई मिसेज़ नार्थ एशिया अमेरिका  विजेता रहीं वर्षा ने अवंतिका से चर्चा में कहा पहले दौर में भारत के सभी राज्यों से 500 प्रतिभागी में से 30 का चयन, उन 30 के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा में मेरा चयन सपना पूरा होने जैसा है।यहां पर मुझे  सीखने की एक ऐसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, जिसने भविष्य में आनेवाली अंतरराष्ट्रीय स्तर‌‌ की प्रतियोगिता में मुझे वास्तव में सहायता की। मैं बस इतना कह सकती हूं कि मेरी इस यात्रा के दौरान मेरे पास बहुत अधिक समय तो नहीं था, फिर भी मुझे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना अभी बाकी था। इसके लिए शांतचित्त रहकर लक्ष्य को पाने की तैयारी मैंने युद्धस्तर पर शुरू कर दी । कहीं ना कहीं मुझे यकीन था कि मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अपने देश का प्रतिनिधित्व करने में सक्षम हूं। इस तैयारी और अन्य पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्वों के बीच सामंजस्य बनाने में मेरे परिवार का विशेष सहयोग कदम कदम पर मुझे मिला ।इससे पहले लास वेगास में मिसेज़ अर्थ इंटरनेशनल पेजेंट में अपने देश का प्रतिनिधित्व करना मेरे स्वप्न के साकार होने के साथ-साथ मेरे जीवन का एक सबसे सुखद एवं गौरवशाली क्षण था। कुल 80 विभिन्न राष्ट्रों से आई सुंदरियों के साथ 3 दिनों तक इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेना और प्रथम 5 में स्थान प्राप्त कर पाना वास्तव में एक विशिष्ट उपलब्धि रही। 

इस उपलब्धि बाद देश की विभिन्न संस्थाओं ने वर्षा चौहान का सम्मान किया है। भविष्य की प्लानिंग के संबंध में उनका कहना था आनेवाले समय में मैं बॉलीवुड सुपरस्टार थीम पर आधारित फैशन शो, जो कि दिल्ली में ही होने वाला है, में भाग लेनेवाली हूं। यदि सही आयोजक व प्रोत्साहनकर्ता मिलें तो भविष्य में फैशन, सामाजिक कल्याण कार्यों और अनाथ व गरीब बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने के लिए मैं हमेशा तैयार हूं।

• 2016-17 की वीनर भी इंदौर की बेटी कंचन फरक्या 

पगड़ी पहन कर पहुँची, मंच पर ताज जगमगा उठा 

यह संयोग भी है और इंदौर के लिए गर्व की बात भी है कि लास वैगास अमेरिका में हुई मिसेज़ नार्थ एशिया स्पर्धा में लगातार दो वर्ष से इंदौर की बेटियों का ही इस ताज पर क़ब्ज़ा रहा है। वर्षा चौहान से पहले गत वर्ष की वीनर श्रीमती कंचन राजकुमार  फरक्या का मायका-ससुराल भी इंदौर का ही है।

कंचन तो स्पर्धा के मंच पर अपनी ड्रेस (गाउन) के साथ सिर पर पगड़ी पहन कर पहुँची थीं। निर्णायक पगड़ी देखकर चौंके, सवाल-ज़वाब वाले राउंड में कंचन से विवाह अवसर पर दुल्हे    

द्वारा पहनी जाने वाली पगड़ी पहन कर आने का कारण पूछा। 


कंचन का जवाब था मुझे इस स्पर्धा में भाग लेने से हर कदम पर प्रोत्साहित करने में पति (राजकुमार) का सहयोग रहा है।यह पगड़ी पहन कर अनुभूति हो रही है कि इस पल भी वे मेरे साथ मंच पर हैं। उनके इस जवाब ने निर्णायकों का दिल जीत लिया और पगड़ी के कारण विजेता का ताज उनके सिर पर जगमग करने लगा। 

वरिष्ठ पत्रकार ओपी फरक्या की बहु कंचन और उनके पूरे परिवार की भी यही टीस है कि मप्र का गौरव बढ़ाने वाली उनकी इस उपलब्धि पर सरकार ने ध्यान ही नहीं दिया।अंतरर्राष्ट्रीय स्तर की पत्रिका वर्ल्ड क्लास ब्यूटी क्वीन ने कंचन फरक्या को अपने कवर पेज पर स्थान दिया है।