बिलासपुर। सास द्वारा बहू को प्रताड़ित करने या फिर घर से बेदखल करने का मामला तो आपने सुना होगा। थाने में इस बात की सैकड़ों शिकायतें भी दर्ज होते रहती है। पर यह सुनने और पढ़ने में अजीब लगेगा कि दामाद को सास प्रताड़ित करती है।


दामाद के पास अपनी बेटी को भेजने के लिए रुपए की मांग करती है। यह सच है। शहर के एक युवक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कुछ इसी तरह की शिकायत की है। युवक अपनी सास से इस कदर प्रताड़ित है कि उसने सास की चंगुल से पत्नी को वापस दिलाने और प्रताड़ना से मुक्ति की गुहार लगाई है।


बिलासपुर के तालापारा निवासी दशरथ लहरे ने अपने वकील के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। जिसमें उसने अपनी आपबीती बताते हुए कहा है कि 21 मार्च 2018 को बिल्हा ब्लॉक के खम्हारडीह निवासी बबीता दिनकर के साथ गिरौधपुरी में समाज के सामूहिक विवाह समारोह में शादी हुई थी।


याचिकाकर्ता ने बताया कि उसने आदर्श विवाह किया था। ससुराल वालों से दहेज भी नहीं लिया था। विवाह के बाद पति पत्नी दोनों उसके गांव जैजैपुर ब्लॉक के ग्राम लोहराकोट गए। चार दिन दोनों बिलासपुर आ गए व तालापारा स्थित किराए के मकान में रहने लगे।


याचिकाकर्ता ने कहा कि पत्नी बबीता चार दिन ही उसके साथ तालापारा स्थित मकान में रह पाई थी कि सास रमशीला दिनकर आई और बिना किसी कारण के उसके साथ झगड़ा करने लगी और अपनी बेटी को साथ लेकर चली गई ।


याचिकाकर्ता दशरथ ने बताया है कि मेरी सास अपनी बेटी को मेरे प्रति भड़काती है और मायके चलने के लिए दबाव बनाती है। पत्नी भी अपनी मां के बहकावे में उसके साथ झगड़ा करती है। बात झगड़ा तक सीमित नहीं है।


पत्नी बबीता अपनी के कहे अनुसार उसे लगातार झगड़ा करती है। किसी बात के लिए मना करने पर मिट्टी तेल डालकर आग लगाने और उसे झूठे मुकदमे में फंसाने धमकाती भी है।


पुलिस ने दी थी कोर्ट जाने की सलाह


दशरथ ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करने से पहले सिविल लाइन थाने में अपनी सास के खिलाफ शिकायत दर्ज कराया था। मामले की पड़ताल करने के बजाय सिविल लाइन थाना प्रभारी ने पुलिस हस्तक्षेप अयोग्य अपराध करार देते हुए शिकायतकर्ता दशरथ को न्यायालय की शरण में जाने की सलाह दे दी।