हममें से बहुत से लोग जानते होंगे कि वास्तुशास्त्र मनुष्य को सकरात्मक और नकरात्मक ऊर्जाओं के बारे में जानकारी देता है ताकि उसके परिवार में सुख-शांति बनी रहें। तो आईए आज हम आपको एक एेसे पेड़ के बारे में बताएं, जिसके बारे में वास्तुशास्त्र में अच्छे से वर्णन किया गया है। इसके अनुसार ये पेड़ जीवन में आ रही हर प्रकार की बाधा दूर हो कर और घर में सुख-समृद्धि का लाता है। 

ये पेड़ अशोक वृक्ष के नाम से जाना जाता है। वास्तु के मुताबिक इस से हमें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और बहुत से बिगड़ते काम बननें लगते हैं। इसे लोग अपने घर आदि में भी लगा सकते हैं लेकिन इसे लगाते समय दिशा का सही चयन करना भी बहुत अनिवार्य होता है। इसलिए हमेशा इसे घर की उत्तर दिशा में ही लगाना चाहिए जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता रहे। क्योंकि वास्तु के अनुसार इसका फायदा तभी होगा जब ये सही दिशा में लगेगा। यह वृक्ष घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनाने में मदद करता है। 


यहां जानें इससे होने वाले फायदे-


जिन बच्चों की याददाश्त कमज़ोर होती है यानि जिन्हें जल्दी याद नहीं होता उन्हें रोज़ कुछ समय के लिए अशोक वृक्ष के नीचे बैठकर पढ़ना चाहिए। इससे उनकी याददाश्त भी तेज़ होगी और पढ़ा हुआ जल्दी याद भी होगा। साथ ही पेड़ की छाल से बने पाऊडर को सुबह-शाम 1 चम्मच गर्म दूध के साथ बच्चे को देने से जल्दी लाभ मिलता है।

अशोक वृक्ष हमारे परिवार में प्रवेश होने वाली नकारात्मक ऊर्जा का भी विनाश करता है। इसके पत्तों की बंदनवार बनाकर घर के मुख्य द्वार पर बाधंने से सकारात्मक ऊर्जा

का आगमन होता है।

शादी-शुदा जीवन को सुखद बनाने के लिए रोज़ अशोक वृक्ष पर महिलाओं को जल चढ़ाना चाहिए, इससे उनका वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है और औरतों में शारीरिक व मानसिक ऊर्जा बनी रहती है।


हर किसी को व्यवसाय में हानि होती है, इसको रोकने के लिए अशोक वृक्ष के बीजों को  साफ़ करके धूप व अगरबत्ती दिखाएं और अपनी समस्याओं से मुक्ति देने की प्रार्थना करें इसके बाद इनमें से एक बीज निकाल कर ताबीज या किसी कपड़े में बांध कर अपने गले में धारण करें। बाकि बचें बीजों को घर में बनी तिज़ोरी में रखें। ये उपाय किसी भी समय में कर सकते है, किंतु शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार को करने से जल्दी फल प्राप्त होगा।   

लड़की की शादी में अगर बाधा आ रही हो तो अशोक के वृक्ष की जड़ और पत्तों को पानी में डालकर उस पानी से कम से कम 41 दिनों तक नहाएं। स्नान करने के बाद पत्तों को पीपल के पेड़ पर डाल दें। ये उपयोग शुक्ल पक्ष के पहले सोमवार को शुरु करना चाहिए इससे विवाह के संयोग जल्दी बननें लगेंगे।