ग्वालियर। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बिजली चोरी का आरोप लगाकर 19 हजार किसानों को 59 करोड़ रुपए के बिल थमा तो दिए थे। लेकिन जब किसान कोर्ट में पहुंचे तो वहां बिजली कंपनी अपने आरोपों को साबित नहीं कर पा रही है। कोर्ट में बिजली चोरी के केस झूठे साबित हो रहे हैं। बिजली कंपनी ने किसानों को समझौते के तहत केस खत्म करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन किसानों ने समझौता नहीं किया। 19 हजार में से 11 हजार 548 किसानों ने कोर्ट में परिवाद दायर कर दिया। बिजली कंपनी इन पर 32 करोड़ 95 लाख का बकाया बता रही थी। लेकिन इनमे से 99 फीसदी मामलों में कंपनी की कार्रवाई झूठी निकली। वैसे भी बिजली नियामक आयोग ने बिजली चोरी को पकड़ने के नियम तय कर रखे हैं। ये नियम किसानों के लिए ही बनाए गए हैं। इनके तहत अगर कोई किसान बिजली की चोरी करता हुआ पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ प्रतिदिन छह घंटे की आपूर्ति के हिसाब से केवल छह महीने की बिलिंग की जा सकती है। लेकिन बिजली कंपनी आयोग के फार्मूले पर काम नहीं कर रही है। बिजली चोरी का आरोप लगाकर किसानों के लिए जो बिल जारी किए गए हैं, उनमें 10 घंटे की बिजली आपूर्ति बताई गई है और साल भर तक बिजली चोरी करने का आरोप लगाया गया है। इसीलिए इन किसानों पर 50 से 70 हजार रुपए तक का बकाया निकाल दिया गया। जबकि किसान को रबी के सीजन में सिंचाई के लिए बिजली की पांच महीने जरूरत पड़ती है। उसे न तो सिंचाई के लिए बारिश के मौसम में बिजली की जरुरत होती है, न गर्मी में। लेकिन बिलिंग बारिश व गर्मी के दिनों को भी जोड़कर कर दी गई। इसीलिए केस कोर्ट में खारिज होते चले जा रहे हैं। बताया जाता है कि कंपनी के कर्मचारियों ने बिजली चोरी के बिल उन किसानों के नाम जारी किए हैं, जिनके पास पहले अस्थाई कनेक्शन हुआ करते थे, जो कि अब बंद हो चुके हैं। यह कार्रवाई भी ऑफिस में बैठकर की गई है। लिहाजा जिस व्यक्ति पर बिजली चोरी का केस लगाया गया है, उसके पंचनामे पर हस्ताक्षर नहीं होते। न कंपनी के पास कोई स्वतंत्र गवाह होता है। बता दें कि बिजली चोरी पकड़ने के बाद पंचनामा जरुरी होता है, जिस पर आरोपी के हस्ताक्षर कराए जाते हैं और उन लोगों के भी, जिनके सामने चोरी पकड़ी जाती है। लेकिन आरोप है कि कंपनी ऐसा कुछ नहीं करती। हालांकि  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, मध्य प्रदेश के एमडी डॉ. संजय गोयल का कहना है कि अदालत में पहुंचे सभी केस बिजली चोरी के नहीं हैं। इनमें बिलिंग के केस भी हैं। चोरी के केसों की संख्या काफी कम है।