नई दिल्ली, केंद्र सरकार में एससी/एसटी कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है. इन एससी-एसटी कर्मचारियों पर डिमोशन का खतरा मंडरा रहा था, लेकिन शीर्ष के आदेश से राहत मिली है.


इसके साथ ही प्रमोशन के इंतजार में सुप्रीम कोर्ट की तरफ एकटक देख रहे केंद्र सरकार के कर्मचारियों के प्रमोशन का रास्ता भी साफ हो गया है. दरअसल, हाल ही के कई न्यायिक फैसलों के चलते आरक्षण में प्रमोशन को लेकर रोक लग गई थी.


शीर्ष अदालत ने 17 मई को जरनैल सिंह बनाम लक्ष्मीनारायण गुप्ता केस में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया. साथ ही आदेश दिया कि प्रमोशन में रिजर्वेशन को लेकर जितनी भी याचिकाएं और केंद्र सरकार की Special Leave Petitions (SLP) पेंडिंग हैं, उनका प्रमोशन नीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा.


ये प्रमोशन रिजर्वेशन कैटेगरी के पदों पर आरक्षण , जनरल कैटेगरी वाले पदों पर जनरल,  मेरिट वाले पदों पर मेरिट के आधार पर होते रहेंगे.


सुप्रीम कोर्ट का फैसला सभी  कैटेगरी पर लागू होगा या नहीं, इस मुद्दे पर कार्मिक मंत्रालय अटॉर्नी जनरल से कानूनी मदद लेगा. दरअसल, नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण को लेकर विभिन्न हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण कार्मिक विभाग ने 30 सितंबर 2016 को एक आदेश निकालकर सभी तरह की पदोन्नति पर रोक लगा दी थी, तब से प्रमोशन को लेकर परेशान कर्मचारी इधर से उधर भटक रहे हैं.


कई राज्यों में तो आरक्षित श्रेणी के कर्मचारियों का डिमोशन भी हो चुका है. केंद्र में भी SC/ST कर्मचारियों पर डिमोशन का खतरा मंडरा रहा था, लेकिन सरकार खुद ही सुप्रीम कोर्ट चली गई. अब शीर्ष अदालत इस मसले पर संविधान पीठ का गठन करेगा.


अदालत के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए ज्वॉइंट एक्शन फोरम फॉर फाइटिंग एट्रोसिटीज (जाफा) के कोऑर्डिनेटर अशोक जाटव ने कहा कि इससे उन SC/ST कर्मचारियों को उम्मीद और राहत मिली है, जिन पर डिमोशन का खतरा मंडरा रहा था.


इस मामले में जाफा के प्रेसिडेंट ओपी गौतम ने कहा कि कार्मिक मंत्रालय अगर इस आदेश को सभी जगह लागू कर दे, तो बहुत बड़ी राहत मिलेगी.