बढ़ती कीमतों और घटते स्पेस के कारण अब घरों का निर्माण पुराने जमाने की तरह आयताकार प्लॉट्स में नहीं हो पाता है। कम स्पेस में ज्यादा सुविधाएं देने के लिए प्लॉट में जिस जगह जो उचित लगता है, बना दिया जाता है। ऐसे घरों में रहनेवाले लोगों को वास्तुदोष के कारण कई बार कैंसर जैसी बीमारी का भी सामना करना पड़ जाता है। देश के जाने-माने वास्तु एक्सपर्ट वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा ने इस बात का जिक्र अपनी पुस्तक ‘संपूर्ण सायंटिफिक वास्तु’ में किया है। इनके अनुसार घर का निर्माण कराते समय या घर खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखकर कैंसर रोग से बचाव का एक प्रयास किया जा सकता है।

जगह की कमी, फिर जरूरत और डिजाइन के हिसाब से किसी जगह को ऊंचा और किसी जगह को नीचा बना दिया जाता है। इस कारण घर में नकारात्मक और सकारात्मक ऊर्जा का असंतुलन बन जाता है और कैंसर जैसी बीमारी का जन्म होने के कारण क्रिएट हो जाते हैं।

अगर आपके घर का वायव्य कोण (उत्तर और पश्चिम दिशा का कोना) घर के बाकी हिस्सों से ऊंचा है तो आपके परिवार में इस बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही घर के अग्नेय कोण, नैऋत्य कोण (दक्षिण – पश्चिम का कोना) और दक्षिण दिशा में पानी का स्रोत होना भी इस बीमारी की वजह बना सकता है।

घर के नैऋत्य कोण में भूमिगत पानी का स्रोत होना तथा ईशान कोण (उत्तर-पूर्व का कोना) की तुलना में घर के अन्य कोणों का नीचा होना इस बीमारी की वजह हो सकता है।

घर की पूर्व दिशा और अग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण का कोना) में पानी का स्रतोत होना, जैसे-टंकी, कुंआ या बोरिंग नहीं होना चाहिए। तथा घर की पूर्व दिशा या अग्नेय कोण नीचा होने पर यह दिक्कत आ सकती है। साथ ही ईशान कोण होने पर भी यह बीमारी परेशान कर सकती है।

दक्षिण दिशा या नैऋत्य कोण में भूमिगत टैंक का होना, इस दिशा और इस कोने का नीचा होना या बढ़ा हुआ होने पर यूट्रस कैंसर की स्थितियां निर्मित हो सकती हैं।