ग्वालियर। 20 फीट गहरे गड्ढे के किनारे बैठकर नहा रहीं तीन मासूम बच्चियों में से दो पैर फिसलने से पानी में गिर गईं। घटना के बाद तीसरी बच्ची पास ही मजदूरी कर रहे एक युवक के पास मदद के लिए पहुंची। मजदूर ने शोर मचाया और अन्य लोगों की मदद से गड्ढे में कूदकर एक बच्ची को बचा लिया, जबकि एक की डूबने से मौत हो गई।


जिसे बचाया गया है उसकी भी हालत गंभीर है। उसे एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया है। फिलहाल वह ट्रॉमा सेंटर में भर्ती है। घटना गुरुवार शाम 4 बजे मोहना के पथरौटा गांव की है। घटना के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची। दोनों बच्चियां आदिवासी परिवार की हैं। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को डेड हाउस भिजवा दिया है।


मोहना थानाक्षेत्र स्थित पथरौटा गांव के बाहर आदिवासी का पुरा है। गांव में रहने वाले रामदीन आदिवासी मजदूर हैं। गुरुवार शाम 4 बजे रामदीन की बेटी अंजली (11) अपनी सहेलियों कविता (9) पुत्री स्व. पप्पू आदिवासी, हसीना (8) के साथ घर के पास ही एक गड्ढे में बने तलाब पर नहाने गई थी। गड्ढे में बने तालाब के किनारे बैठकर बच्चियां जब नहा रहीं थी तभी अचानक अंजली का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में जा गिरी।


उसे डूबता देख कविता ने भी उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन एक कदम आगे बढ़ाते हुए वह भी फिसलकर गड्ढे में जा गिरी। जब दोनों पानी में गोते खाने लगीं तो मासूम हसीना ने तत्काल बाहर की तरफ दौड़ लगा दी। पास ही एक खेत पर काम कर रहे मजदूर को उसने सारी बात बताई। उस मजदूर ने तत्काल शोर मचाते हुए आसपास के लोगों को एकत्रित किया और बच्चियों को बचाने कूद पड़ा


। जब लोग वहां पहुंचे तो अंजली डूब चुकी थी जबकि कविता गोते खा रही थी। युवक ने कविता को बाहर निकाला। तत्काल मामले की सूचना मोहना थाना पुलिस और एम्बुलेंस 108 सेवा को दी। पुलिस मौके पर पहुंची और कविता को तत्काल जेएएच के लिए पहुंचाया। जबकि पुलिस ने गोताखोरों की मदद से अंजली का शव भी निकलवा लिया। शव को निगरानी में लेकर डेड हाउस में रखवा दिया गया है। अंजली घर में अकेली बेटी थी। जबकि कविता के पिता नहीं है। मां मजदूरी करती हैं। वह चार बहने हैं।


जब खुद रहा था गड्ढा तो किया था विरोध -


गांव के लोगों ने बताया कि यह गड्ढा पम्बा सिंह पुत्र निरंजन सिंह ने खुदवाया था। यह 20वाई20 का गड्ढा करीब 20 से 25 फीट गहरा है। इसको बनाने का मकसद पास ही नदी से खेती के लिए पानी को रोकना था। पीड़ित परिवारा का आरोप है कि जब यह गड्ढा बन रहा था तभी विरोध किया था। पता था ऐसा ही कुछ कभी भी हो सकता है। पर किसी ने नहीं सुनी और आज दुघर्टना हो गई।