विश्व में एकमात्र इंडोनेशिया ऐसा देश है जहां भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का प्रभाव दुनिया के किसी भी अन्य देश से सबसे अधिक देखने के लिए मिलता है। यहां हिंदू परंपराओं को काफी महत्व दिया जाता है। तभी यहां 20 हजार की करंसी में भी आपको गणेशजी की फोटो के दर्शन होते हैं। इसके साथ ही यहां कई भव्य व आकर्षक हिंदू देवी-देवताओं के मंदिर भी हैं। जिनकी गिनती दुनिया के प्राचीनतम व श्रेष्ठ मंदिरों में होती है। ऐसे ही अद्भुत मंदिरों की चलिए करते हैं यात्रा…

भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर बाली द्वीप की एक बहुत बड़ी समुद्री चट्टान पर बना है। यह मंदिर आस-पास फैली प्राकृतिक छटा की वजह से देखने में काफी सुंदर लगता है। बताया जाता है कि इसका निर्माण 16वीं शताब्दी में करवाया गया है। अपनी अलौकिक सुंदरता के कारण यह मंदिर इंडोनेशिया के प्रमुख दर्शनीय स्थलों की सूची में सबसे ऊपर आता है। इसके साथ ही यह स्थानीय हिंदुओं की आस्था का भी प्रमुख केंद्र है।

बाली के उबुद में निर्मित पुरा तमन सरस्वती मंदिर, ज्ञान व विद्या की देवी सरस्वती को समर्पित है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यहां भी देवी सरस्वती को ज्ञान व संगीत की देवी के रूप में पूजा जाता है। ऐसे मंदिर का मुख्य आकर्षण यहां बना एक सुंदर कुंड है। जहां रोजाना संगीत कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। कुंड में कमल पुष्प की शोभा अद्भुत अहसास दिलाती है।

बाली द्वीप के माउंट अगुंग में स्थित इस मंदिर की गिनती इंडोनेशिया के सबसे खूबसूरत मंदिरों में होती है। यहां ऐसा जान पड़ता है जैसे प्रकृति स्वयं पुरा बेसकिह मंदिर का अभिषेक कर रही है। खास बात है कि बाली के इस सबसे बड़े व पवित्र मंदिर को साल 1995 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर का सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। इस मंदिर में कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं, जिन्हें देखने के लिए दुनियाभर से श्रद्धालु व पर्यटक आते हैं।

पूर्वी जावा के सिंगोसरी में बना सिंघसरी शिव मंदिर की स्थापना 13वीं शताब्दी में हुई है। इस विशाल भव्य मंदिर में भगवान शिव का अलौकिक रूप देखने के लिए मिलता है। जिनके दर्शन के लिए रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का दर्शन के लिए आना होता है। इस मंदिर की खास बात है कि भगवान शिव को समर्पित त्योहार यहां बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं। उस समय यहां का अद्भुत दृश्य शब्दों में बयां करना असंभव है।

जावा द्वीप के मध्य में स्थित प्रम्बानन मंदिर त्रिदेव यानी भगवान शिव, विष्णु व ब्रह्माजी को समर्पित है। इस मंदिर को भी यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया जा चुका है। खास बात है कि यहां स्थापित त्रिदेवों के साथ ही उनके वाहनों के लिए भी अलग से मंदिर बनाकर, उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।

सदियों पुराने एक हिंदू मंदिर की खोज में सालों पुराना शिवलिंग मिला है। बताया जाता है कि यह मंदिर जावा द्वीप पर स्थित है। इस शिवलिंग की खासियत है कि यह स्फटिक से बना है, जिसके अंदर कोई तरल द्रव्य भी मौजूद है। हैरानी की बात है कि सदियों से यह पदार्थ ऐसा ही है, सूखा नहीं है। स्थानीय लोग इस तरल पदार्थ को अमृत मानते हैं। हालांकि वैज्ञानिक इस बात की पुष्टि नहीं करते है, इस पर शोध चल रहा है कि यह पदार्थ है क्या?