बिलासपुर। बांग्लादेश से नौकरी के लालच में दलालों के चंगुल में फंसकर मानव तस्करी की शिकार हुई युवती भारत के कई शहरों में शारीरिक शोषण कराने के लिए मजबूर होती रही। बिलासपुर रेलवे स्टेशन में कोलकाता ले जाते समय जीआरपी ने एक दलाल के साथ युवती को पकड़ था। उसे उज्ज्वला होम्स में रखा गया था।


11 माह बाद बांग्लादेश उच्चायुक्त ने उसे वापस भेजने की अनुमति के साथ ही ट्रेवलिंग पास जारी कर दिया है।


जीआरपी ने जुलाई 2017 में ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस से युवती के साथ ही मुर्शिदाबाद निवासी आरोपी संटू शेख को पकड़ा था।


इस दौरान पीड़ित युवती का बयान दर्ज कर जीआरपी ने आरोपी दलाल के खिलाफ मानव तस्करी समेत दुष्कर्म का मामला दर्ज किया था। वहीं पीड़िता को सुरक्षा के लिहाज से राजकिशोर नगर स्थित उज्ज्वला होम्स में रखा गया। इस बीच कोर्ट में भी पीड़िता का बयान दर्ज किया गया।


उज्ज्वला होम्स में समाज सेविका वकील गुंजन तिवारी को युवती बताया उसे नौकरी का लालच देकर भारत लाया गया था। फिर उसे जगह-जगह कई बार बेच जबरिया दुष्कर्म कराने के लिए मजबूर किया गया। उज्ज्वला होम्स वह अपने परिजनों के पास वापस जाने के लिए मिन्नतें कर रही थी।


उज्ज्वला होम्स के संचालक जितेंद्र मौर्य व वकील गुंजन तिवारी राजधानी रायपुर के साथ ही केंद्र सरकार के उच्चायुक्त व बांग्लादेशी दूतावास से पत्राचार कर लगातार प्रयास करते रहे। आखिरकार बांग्लादेश दूतावास के हाई कमिश्नर ने युवती को वापस भेजने की अनुमति दे दी। तीन महीने के भीतर पीड़ित युवती अपने गांव जा सकती है।


गिरोह के सरगना समेत अन्य आरोपी हैं फरार


पीड़िता के बयान के अनुसार पुलिस की गिरफ्त में आया दलाल संटू शेख इस पूरे गिरोह का मोहरा मात्र था। गिरोह के सरगना समेत अन्य सदस्यों का नाम पीड़िता ने पुलिस व कोर्ट को बताया। लेकिन गिरोह के सरगना समेत अन्य सदस्य फरार हैं। जीआरपी की टीम उनकी जानकारी जुटाकर पतासाजी कर रही है।


इनका कहना है


बांग्लादेशी युवती अपने गांव वापस जाना चाह रही थी। लेकिन उच्चायुक्त से अनुमति नहीं मिलने व कानूनी अड़चनों के कारण वह उज्ज्वला होम्स में रह रही थी। इस बीच उच्चायुक्त को टि्वट कर बांग्लादेश दूतावास से पत्राचार किया। आखिरकार बांग्लादेश उच्चायोग के हाई कमिश्नर से अनुमति मिल गई है।