'आर्काइव्स ऑफ सेक्शुअल बिहेवियर' में पब्लिश हुई एक नई स्टडी में यह बात सामने आयी है कि कुछ महिलाएं एक महीने में 55 बार तक ऑर्गैज्म कर सकती हैं। यहां हैरान करने वाली बात यह थी कि इतनी बार ऑर्गैज्म हासिल करने वाली इन महिलाओं ने किसी पुरुष के साथ इंटरकोर्स नहीं किया था। जी हां, इन महिलाओं ने पुरुषों के साथ नहीं बल्कि फीमेल पार्टनर संग सेक्स किया। इस रिसर्च से जुड़े और भी कई हैरान करने वाले नतीजे सामने आए हैं। आगे पढ़ें...

अनुसंधानकर्ताओं ने 3 हजार महिलाओं को 2 अलग-अलग कैटिगरी में रखा। पहली कैटिगरी में वैसी महिलाएं जिनका प्राइमरी पार्टनर पुरुष था और दूसरी कैटिगरी उन महिलाओं की जिनकी प्राइमरी पार्टनर महिला थी। इसके बाद इन महिलाओं से यह सवाल पूछा गया कि वे कितनी बार ऑर्गैज्म करती हैं, कितनी बार सेक्शुअल ऐक्टिविटीज में शामिल होती हैं और किस तरह की सेक्शुअल ऐक्टिविटी उन्हें पसंद है। रिसर्च में शामिल महिलाओं की सेक्शुअल गतिविधियों पर 4 हफ्ते तक नजर रखी गई।

रिसर्च के नतीजों के मुताबिक लेस्बियन महिलाओं ने 1 महीने में 10 बार सेक्स किया जबकि नॉर्मल कपल्स ने 1 महीने में 15 बार सेक्स किया। लेकिन सेक्स की फ्रीक्वेंसी का फीमेल ऑर्गैज्म से कोई संबंध नहीं था। ऐसी महिलाएं जो फीमेल पार्टनर के साथ थी वे 3 गुना ज्यादा ऑर्गैज्म महसूस करती थीं उन महिलाओं की तुलना में जिन्होंने पुरुष पार्टनर संग इंटरकोर्स किया।

रिसर्च में बताए गए स्टैटिस्टिक्स के मुताबिक, 95 प्रतिशत पुरुष पार्टनर वाली महिलाओं ने बताया कि उनके पुरुष पार्टनर हर बार ऑर्गैज्म महसूस करते हैं। जबकि सिर्फ 73 प्रतिशत पुरुषों ने कहा कि उनकी फीमेल पार्टनर हर बार ऑर्गैज्म महसूस करती है।

पुरुष पार्टनर की तुलना में महिला पार्टनर के साथ रहने वाली महिलाएं ज्यादा ऑर्गैज्म महसूस क्यों करती हैं इसका कारण यह है कि हेट्रोसेक्शुअल कपल जब इंटरकोर्स करते हैं तो उनका मुख्य फोकस पेनिट्रेटिव सेक्स पर होता है और इसमें महिलाओं को क्लाइमैक्स तक पहुंचने में मदद मिले ऐसा जरूरी नहीं है। इस प्रक्रिया में मेल ऑर्गैज्म को सेक्स सेशन का फिनाले माना जाता है और इस दौरान महिलाओं को ऑर्गैज्म महसूस हुआ या नहीं इस बात को तवज्जो नहीं दी जाती।