आजकल भागदौड़ वाली जिंदगी और काम के प्रेशर के चलते लोग न चाहते हुए भी कई बार डिप्रेशन (अवसाद) के शिकार हो ही जाते हैं। डिप्रेशन का सबसे बेहतर उपचार होता है योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करना। इसके साथ ही वास्‍तु के कुछ उपाय भी डिप्रेशन को दूर करने में मददगार सिद्ध हो सकते हैं। जानिए क्‍या हैं ये उपाय…

घर में शाम के वक्‍त रोगी स्‍वयं उठकर 5 सुगंधित अगरबत्‍ती जलाकर घर के सभी अलग-अलग स्‍थानों पर रख दें। इससे आपके घर में सकारात्‍मक वातावरण रहेगा और रोगी सहज महसूस करेगा।

अगर आपके घर में कोई डिप्रेशन का मरीज है और नहीं भी है तो आगे न हो इससे बचने के लिए दीवारों, दरवाजों और खिड़कियों पर हल्‍के रंग करवाएं। ताकि गहरे रंगों के कारण उत्‍पन्‍न होने वाली नीरसता से बचा जा सके।

अगर आपके घर में कोई डिप्रेशन का रोगी है तो आपको सोफे का रंग हल्‍के नीले रंग का रखना चाहिए। ऐसा करने से रोगी का दिमाग ठंडा रहेगा और मानसिक शांति बनी रहेगी।

रोगी के घर में जाले गलती से भी न रहने पाएं। जाले मानसिक तनाव को बढ़ाते हैं।

ध्‍यान रखें कि आपके घर में अगर कोई डिप्रेशन का मरीज है तो रसोई में काले रंग का पत्‍थर न लगवाएं, क्‍योंकि काला रंग निराशा देता है।

डिप्रेशन के रोगी के कमरे में गलती से भी शराब का सेवन न करें ताकि तनाव और भयानक सपनों से रोगी को बचाया जा सके।

रोगी के घर की रसोई में रात को जूठे बर्तन नहीं छोड़ने चाहिए। ऐसा करने से घर में नकारात्‍मक ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है। ऐसे में डिप्रेशन से परेशान रोगियों की परेशानी और ज्‍यादा बढ़ सकती है। रसोई में एक बात और ध्‍यान रखने वाली यह है कि चूल्‍हा और पानी एक ही सीध में नहीं रखा जाना चाहिए। इन्‍हें दूर-दूर रखना चाहिए। ऐसा करने गृह कलेश नहीं होता और वातावरण सुखमय रहता है।

रोगी को घर में सूती आसन बिछाकर प्रात: बेला में 7 बजे से पहले ही पूजा-पाठ कर लेनी चाहिए। शास्‍त्रों में बताया गया है कि यही समय पूजा का अधिकतम सकारात्‍मक परिणाम देने वाला होता है।