मलमास, अधिक मास या पुरुषोत्तम मास चाहे जिस नाम से भी पुकार लीजिए, श्रीकृष्ण और श्रीविष्णु के भक्तों के लिए यह महीना किसी बड़े पर्व की तरह होता है। इस मास में पड़ने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहते हैं। यह एकादशी हर साल नहीं आती है बल्कि यह अधिकमास के साथ ही आती है।

पुराणों में बताया गया है कि जितना पुण्य कन्यादान, हजारों वर्षों की तपस्या और स्वर्ण दान से मिलता है उससे अधिक पुण्य एक मात्र पद्मिनी एकादशी व्रत करने से मिलता है। पद्मिनी एकादशी व्रत को करने से व्रत करनेवाले व्‍यक्‍ति को बैकुंठधाम की प्राप्ति होती है। जीवन सुख-सौभाग्य से भर जाता है। मनुष्य को भौतिक सुख तो प्राप्त होते ही हैं, मृत्यु के बाद उसे मोक्ष भी प्राप्त हो जाता है।

इस तरह करें धर्म-कर्म के काम
पद्मिनी एकादशी के दिन ध्यान पूर्वक पूजा पाठ और धर्म-कर्म के काम किए जाएं तो साल भर भगवान विष्णु का प्रेम और मार्गदर्शन मिलता है। इस दिन व्रत करने से प्राप्त होनेवाले पुण्य का महत्व स्वत: ही कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि आज के दिन जितना त्याग किया जाए, भगवान विष्णु उतनी अधिक संपन्नता अपने भक्त को देते हैं।

एकादशी का तिथि व मुहूर्त
पद्मिनी एकादशी– 24 मई 2018
पारण का समय – 05:29 से 08:13 बजे तक (26 मई 2018)
एकादशी तिथि आरंभ – 06:18 (24 मई 2018)
एकादशी तिथि समाप्त – 05:47 (25 मई 2018)

पद्मिनी एकादशी के दिन क्या करें?
शास्त्रों का कहना है कि जो मनुष्य इस एकादशी का व्रत रखते हैं उन्हें सदाचार का पालन करना चाहिए। जो यह व्रत नहीं भी करते हैं उन्हें भी इस दिन लहसुन, प्याज, बैंगन, मांस-मदिरा, पान-सुपारी और तंबाकू से परहेज रखना चाहिए। इस दिन जुआ और निद्रा का त्याग करना चाहिए और रात में भगवान विष्णु का नाम का स्मरण करते हुए जागरण करना चाहिए।

क्या न करें?
व्रत रखनेवाले को दशमी तिथि के दिन से ही मन में भगवान विष्णु का ध्यान शुरू कर देना चाहिए और काम भाव, भोग विलास से खुद को दूर कर लेना चाहिए तथा मूली, मसूरदाल के सेवन से परहेज रखना चाहिए। व्रत के दौरान कांसे के बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिए। व्रत में नमक का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए।

ऐसे करें पूजा
सुबह स्नानादि से निवृत होकर भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत करने का संकल्प लें। साथ ही भगवान विष्णु से व्रत के सफलतापूर्वक पूरा होने की प्रार्थना करें। भगवान विष्णु की तस्वीर पर गंगाजल के छींटे देने के बाद रोली-अक्षत से तिलक करें और फूल चढ़ाएं। आज के दिन सफेद फूल से विष्णु पूजन का महत्व है।

इसके बाद भगवान विष्णु को फलों का भोग लगाएं। समय हो तो सुबह या शाम को मंदिर जाएं। धूप-दीप करें। गरीबों और ब्राह्मणों को आज फलों का दान दें। हो सके तो रात को न सोएं और रातभर भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन करें। यदि ऐसा संभव न हो तो आज जमीन पर सोएं, बेड पर नहीं। अगले दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करने के बाद मंदिर में धूप-दीप करें और व्रत की सफलता के लिए भगवान को धन्यवाद दें। सूर्य को जल चढ़ाएं और तुलसी के सामने धूप-दीप करें। आपके सभी मनोरथ पूर्ण होंगे।