नई दिल्ली। देश में सस्ते आयात को रोकने और मूल्य में गिरावट थामने के लिए सरकार ने गेहूं के आयात पर शुल्क बढ़ाकर 30 फीसद कर दिया है। अब तक इस पर 20 फीसद शुल्क लगता था। सरकार ने अखरोट के आयात पर भी शुल्क 30 फीसद से बढ़ाकर 100 फीसद कर दिया है।


केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआइसी) ने इसके संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार ने गेहूं पर आयात शुल्क ऐसे समय में बढ़ाया है जब देश में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय बाजार खासकर रूस से सस्ते गेहूं के आयात से घरेलू बाजार में मूल्य घटने की आशंका पैदा हो गई है। दुनिया के कई देशों में इस साल गेहूं का ज्यादा उत्पादन होने की संभावना है।


उद्योग के जानकारों का कहना है कि सरकार विदेशी आयात को नियंत्रित करना चाहती है ताकि घरेलू बाजार में मूल्य पर दबाव न बने। भाव गिरने से किसानों को नुकसान हो सकता है। सरकार का प्रयास है कि घरेलू बाजार में गेहूं के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1735 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे न गिरें।


देश में गेहूं की अधिकांश कटाई पूरी हो चुकी है। सरकार ने करीब 333 लाख टन गेहूं की खरीद की है। बड़ी मात्रा में गेहूं की खरीद करने के बाद सरकार फ्लोर मिलों जैसे बल्क उपभोक्ताओं को 1900 रुपये प्रति क्विंटल (एक्स-लुधियाना) के भाव पर बेचने का विचार कर रही है।


एक मिल संचालक ने बताया कि अगर आयात शुल्क नहीं बढ़ाया जाता तो गेहूं बेचने की सरकार की योजना प्रभावित हो सकती थी। सरकार के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार चालू सीजन में देश में 986 लाख टन गेहूं का उत्पादन होने की संभावना है। उद्योग के आंकड़ों के अनुसार चालू सीजन में अब तक देश में 14.8 लाख टन गेहूं का आयात हो चुका है।