इंदौर। इंदौर के प्रमुख चौराहों पर लगे रेड लाइट वायलेशन डिटेक्शन (आरएलवीडी) कैमरों से ट्रैफिक पुलिस अब तक 9 करोड़ रुपए कमा चुकी है, लेकिन इन हाईटेक कैमरा सिस्टम में एक सुविधा का उपयोग आज तक नहीं कर सकी। इसमें पुलिस कंट्रोल रूम से बैठे-बैठे अनाउंसमेंट कर इन चौराहों पर वाहन चालकों को दिशानिर्देश दे सकती है। अब ट्रैफिक पुलिस इसके मेंटेनेंस के लिए नया टेंडर निकाल रही है, जिसमें कंपनी को इसका उपयोग करना अनिवार्य होगा।

पुलिस ने 2015 में लैंटर्न चौराहे पर प्रायोगिक तौर पर आरएलवीडी कैमरे लगाकर शहर में इसकी शुरुआत की थी। बाद में शहर के 15 चौराहों पर इस तरह के कैमरे लगाए। सिंहस्थ के समय एक दर्जन से अधिक चौराहे पर भी ये कैमरे लगाए गए हैं। ट्रैफिक पुलिस सूत्रों के मुताबिक पहली बार जो 15 कैमरे लगे थे, उस समय इसका ठेका 8 करोड़ 43 लाख रुपए में दिया गया था। पिछले 3 साल में 9 करोड रुपए ई-चालान के माध्यम से ट्रैफिक पुलिस को मिले हैं।

अधिकारियों ने बताया कि इन कैमरों में चालान बनाने के साथ ही पब्लिक अनाउंस (पीए) सिस्टम भी लगा हुआ है लेकिन इसका उपयोग नहीं हो पाया है। इसके माध्यम से पुलिस आरएलवीडी कैमरों से लैस चौराहे पर सीधे वाहन चालकों को सूचना दे सकती है। इससे वाहन चालकों में यह डर भी रहेगा कि पुलिस कैमरों के माध्यम से उन पर सीधे नजर रखती है लेकिन एक-दो दिन प्रयोग के बाद इस सुविधा का उपयोग नहीं किया गया। अब जब वर्तमान कंपनी का ठेका खत्म हो रहा है तो नई कंपनी के लिए पीए सिस्टम को अनिर्वाय करना शर्तों में जोड़ा जाएगा। नई कंपनी को इसके मेंटेनेंस का ठेका करीब 80 लाख रुपए में दिया जाएगा।

अनिवार्य होगा पीए सिस्टम का उपयोग हमारे आरएलवीडी कैमरों के पीए सिस्टम का उपयोग सही तरीके से नहीं हो पा रहा है। अब जो कंपनी इसका मेंटेनेंस करेगी, उसे इसकी सभी सुविधाओं और फंक्शन का उपयोग शुरू करना होगा। - प्रदीपसिंह चौहान, एएसपी, ट्रैफिक