ग्वालियर। एपी एसी एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद घबराए यात्रियों ने समीप ही बनी चंदन नगर कॉलोनी में शरण ली, जबकि कुछ बिरला नगर स्टेशन पर जाकर बैठ गए। 44 डिग्री तापमान में भूख प्यास से बेहाल यात्रियों के लिए रेलवे की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। ऐसे में कॉलोनी वालों ने यात्रियों के लिए चाय नाश्ते का इंतजाम किया और बच्चों को पानी पिलाया। वहीं ऑटो चालकों ने जरूर मौके का फायदा उठाने में कसर नहीं छोड़ी और लोगों को रेलवे स्टेशन तक छोड़ने के 80-150 रूपए तक वसूल किए। खास बात यह है कि स्टेशन पर भी यात्री अपने सामान को लेकर खासे परेशान दिखाई दिए और सही जानकारी नहीं मिलने पर इधर-उधर भटकते रहे।


रेलवे अधिकारी भले ही यह दावा कर रहे हो लेकिन हकीकत यह है कि भूख प्यास से बेहाल लोगों को समय पर कोई सहायता नहीं उपलब्ध कराई गई। आलम यह था कि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने भी केवल प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टर के लिए वाहनों की व्यवस्था की थी, जिनके जरिए उन्हें सुरक्षित सर्किट हाउस पहुंचाया गया। जबकि साधारण यात्री खासे परेशान रहे, एसी कोच में सफर करने वाले यात्रियों ने झोपड़ियों में शरण ली। जहां उनको लोगों ने चाय, पानी एवं नाश्ता तक कराया। चंदन नगर इलाके में रहने वालों ने धूप में परेशान लोगों को अपने घरों में शरण दी। लोगों ने पूछताछ की तो पता चला कि ग्वालियर रेलवे स्टेशन से उनकी आगे की यात्रा के लिए ट्रेन की व्यवस्था कराई जाए। दोपहर करीब डेढ़ बजे तक जब कोई वाहन की व्यवस्था नहीं हुई तो यात्री ऑटो करके रेलवे स्टेशन तक पहुंचे। जिसकी एवज में उन्हें 80 से 150 रूपए तक चुकाने पड़े हैं। एक यात्री ने जब इसकी शिकायत आरपीएफ टीआई आनंद पांडेय से की तो उन्होंने ऑटो चालक को फटकार लगाई और उचित किराया लेने की हिदायत भी दी। इस दौरान आरपीएफ टीआई ने घटना को लेकर यात्रियों से बातचीत भी की है।


सामान को लेकर परेशान रहेः


आग केवल बी-7 एवं बी-6 कोच में लगी थी, ऐसे में अन्य कोच में सवार यात्री बिना सामान लिए ही ट्रेन से बाहर आ गए थे। स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर एक पर ट्रेन के कटे हुए कोच तो पहुंच गए लेकिन वह लॉक थे। ऐसे में लोग इधर उधर ट्रेन की बाबत जानकारी लेते रहे, खाने का सामान भी कोच में होने के कारण लोगों को परेशानी झेलना पड़ी है।


रेलवे ने जारी किए हेल्प लाइन नंबरः


ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर हेल्प डेस्क लगाई गई थी। साथ ही रेलवे ने हेल्प लाइन नंबर भी जारी किए। इसमें झांसी के लिए 0510-2440787, 2440790 एवं ग्वालियर के लिए 0751-2432797 एवं 2432849 शामिल है। इन नंबरों पर ट्रेन के यात्रियों को लेकर जानकारी उपलब्ध कराई जा रही थी।


प्लेटफार्म पर लगी भीड़


ट्रेन हादसे के बाद सभी यात्री जैसे तैसे ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए थे, ऐसे में प्लेटफार्म नंबर एक पर पैर रखने की जगह तक नहीं थी। इस दौरान प्लेटफार्म पर जरूरतमंदों को ओवर चार्जिंग का शिकार भी होना पड़ा है। एक यात्री राजू ने बताया कि उनको प्लेटफार्म नंबर तीन पर पानी की बोतल भी 20 रूपए की मिली है।


वर्जनः


हम लोग नई दिल्ली से विशाखापट्टम जा रहे थे, कोच बी-3 में हमारा रिजर्वेशन था। आग लगने के बाद हम सामान छोड़कर उतर गए। पहले तो स्टेशन तक आने के लिए खासे परेशान हुए और दोगुना किराया देना पड़ा। इसके बाद स्टेशन पर पहुंचे तो कोच लॉक होने के कारण खाने तक के लिए परेशान हो गए।


वासु, यात्री

 

आग लगने के बाद हम लोग गर्मी में बेहाल भूखे प्यासे काफी देर तक बिरला नगर स्टेशन पर बैठे रहे। हमसे कहा गया कि वाहन की व्यवस्था की जाएगी, लेकिन जब कोई इंतजाम नहीं हुआ तो दोपहर डेढ़ बजे करीब हम निजी साधन से ग्वालियर स्टेशन पहुंचे। यहां भी खाने पीने की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी।


राजेश, यात्री


क्या कहते हैं रेलवे अधिकारीः


वर्जनः


घटना के बाद रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए खाने के पैकेट एवं पानी की बोतलों का इंतजाम किया गया था। इसके अलावा डॉक्टर्स की टीम भी मौजूद थी। बसों के जरिए यात्रियों को ग्वालियर स्टेशन तक पहुंचाया गया है। यात्रियों को परेशान नहीं हो इसका पूरा ध्यान रखा गया। झांसी में भी वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक ट्रेन पर पहुंचे और यात्रियों से उनके हालचाल और घटनास्थल पर पहुंचाई गई राहत सामग्री के बारे में जानकारी ली है। जिसमें सभी ने संतोष जाहिर किया है।


मनोज सिंह, जनसंपर्क अधिकारी झांसी मंडल