27 नक्षत्रों में 8वां नक्षत्र है पुष्य, इसे श्रेष्ठ और नक्षत्रों का राजा कहा गया है क्योंकि ये अन्य नक्षत्रों से अधिक शुभ और सुखद फल देने वाला है। भगवान श्रीरामचन्द्र भी इसी नक्षत्र में पैदा हुए थे। रविवार, 20 मई को पुष्य नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। रविवार को पुष्य योग आने से ये रवि पुष्य योग कहलाता है। जो बहुत मंगलकारी माना जाता है। इस दौरान ग्रहों की अशुभता शुभता में बदल जाती है और सुखद परिणाम देती है। वर्ष 2018 में 3 रवि पुष्य और 2 गुरु पुष्य योगों का संयोग बनेगा।

रवि पुष्य योग में कोई भी काम बेधड़क होकर किया जा सकता है। इस दौरान ग्रहों की टेढ़ी चाल भी सीधा प्रभाव देती है। सोना, प्रॉपर्टी, वाहन खरीदने से लेकर बिजनेस के बड़े फैसले लेने का भी यह शुभ मौका है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस शुभ योग में पूजा-पाठ का बहुत महत्व है। कोई भी नया काम बिना मुहूर्त देखे आरंभ किया जा सकता है। 

धन और मान सम्मान में वृद्धि के लिए करें ये उपाय-

गाय को गुड़ खिलाएं।


सूर्य को तांबे के पात्र में जल, लाल फूल और चावल डालकर अर्घ्य दें।

कारोबार में नुक्सान हो रहा हो तो आप अपने वजन के बराबर कच्चा कोयला लेकर जल में प्रवाह कर दें। अवश्य लाभ होगा।