गुना से राघौगढ़ का फासला सिर्फ 40 किमी है, लेकिन सियासत ने इसे दो दशक लंबा बना दिया था. मध्य प्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया को हाल ही में जब दावत पर राघौगढ़ किले पहुंचे तो सियासी हलचल तेज हो गई. कई लोग इसे प्रदेश में बदलते राजनीतिक माहौल से आंक रहे हैं तो कोई इसे जनरेशन नेक्सट की पॉलिटिक्स के बतौर देख रहा है. जहां सिंधिया और दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन के रिश्ते बेहतर हैं.


आखिर इस दावत की वजह क्या है. कुल मिलाकर मसला राजनीति का है. राजा और महाराजा याने दिग्विजय सिंह – सिंधिया मिलकर गुना, ग्वालियर, चंबल, इंदौर, उज्जैन, संभाग की 80 से ज्यादा सीटों पर दखल रखते हैं. यहां उनके समर्थकों की गुटबाजी कांग्रेस को भारी पड़ सकती है.


सूत्रों का कहना है कि हाल ही प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने एक लंबी बैठक दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह के साथ की है. उस बैठक का ही यह नतीजा है कि सिंधिया राघौगढ़ किले में दावत पर पहुंचे हैं. उल्लेखनीय है कि कमलनाथ ने कमान संभालते ही कांग्रेस को एकजुट करने की कोशिशें तेज कर दी हैं. पूर्व ‌विधायक कल्पना परूलेकर, राजनारायणसिंह पूरणी, समेत कई निष्कासित नेताओं की उन्होंने कांग्रेस वापसी कर दी है.


उनके सामने सबसे बड़ी समस्या राजा और महाराजा समर्थक नेताओं की है. सिंधिया को मुख्यमंत्री के बतौर प्रोजेक्ट करने और दिग्विजय सिंह द्वारा इसे रोके जाने की अटकलों ने भी कांग्रेस के माहौल का खराब किया है. दोनों के ही समर्थक अपने-अपने नेताओं के साथ लामबंद हो रहे थे. इससे निपटने के लिए एक मैसेज जरूरी था.



जयवर्धन सिंह पहली बार के विधायक हैं और दिग्विजय सिंह की राघौगढ़ से गैर मौजूदगी में उनकी पारिवारिक ही नहीं राजनीतिक विरासत को संभाल रहे हैं. उनकी व्यक्तिगत तौर पर सिंधिया से काफी बनती है. वे सिंधिया की संसदीय सीट की दो विधानसभा मुंगावली कोलारस में हुए उपचुनाव में भी प्रचार के लिए जा चुके हैं.


क्या इस दावत के बाद महाराजा और राजा के बीच की सियासी दूरियां खत्म हो गई है? जानकारों का कहना है कि यह वक्त की नजाकत है. हालात तेजी से बदल रहे हैं. सिंधिया मुख्यमंत्री के बतौर प्रोजक्ट नहीं किए गए हैं. लेकिन वे तेजी से एक सर्वमान्य नेता के बतौर स्थापित होने की कोशिश में है. ऐसे में उनका दावत को स्वीकारना एक नई राजनीतिक शुरुआत है.


उनकी हाल ही में शुरू हुई परिवर्तन रैली को भी देखें तो उन्होंने लगातार कार्यकर्ताओं के बीच यह मैसेज दिया कि उनके लिए सभी गुट के नेता बराबर है. उनकी उज्जैन रैली का दिग्विजय समर्थक प्रेमचंद गुड्‌डू ने मोर्चा संभाला. इंदौर में वे सिंह समर्थक कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी के घर सुबह के नाश्ते पर गए. जहां सभी गुटों के नेताओं से खुलकर मिलते रहे.


धार के राजौद, जीराबाद में हुई परिवर्तन रैली में पहली बार सिंधिया समर्थक उमंग सिंघार के अलावा बड़ी संख्या में दिग्विजय सिंह, अरुण यादव, कमलनाथ समर्थकों का जमावड़ा रहा. जिसे देखते हुए कई लोगों ने इसे सिंधिया की स्वयं की परिवर्तन रैली कहा. माना जा रहा है कि कुछ खास इलाकों में अब सिंधिया की परिवर्तन रैली में जयवर्धन सिंह भी साथ होंगे.