रमजान का चांद देखने के साथ ही इबादतों का महीना शुरू हो गया है। गुरुवार से रोजा शुरू होगा। इस साल पहला रोजा 14 घंटे 58 मिनट का तो है ही, लेकिन मौसम भी कड़ा इम्तिहान लेगा। गर्मी महीने के शुरुआती दौर में ही इस साल तापमान 35 से 40 डिग्री से ऊपर रह रहा है। बीच में अगर बारिश नहीं हुई तो रोजेदारों को प्यास शिद्दत से लगेगी। पिछले साल 28 मई से रोजा शुरू हुआ था। तब अधिकतम तापमान 31 डिग्री था। रोजे की समयावधि में पिछले साल और इस साल में एक-दो मिनट का अंतर है। पिछले साल 03: 26 में सेहरी और 06: 35 में इफ्तार यानि रोजा खोलने का टाइम था। इमारत-ए-शरिया, फुलवारीशरीफ की ओर से जारी रमजान का कैलेंडर के अनुसार इसबार पहला रोजा 03: 32 बजे अहले सुबह से 06: 30 बजे शाम तक का होगा। धीरे-धीरे समय एक-दो मिनट बढ़ते हुए अंतिम रोजा 06: 43 बजे खोला जाएगा। दूरी के हिसाब से एक जगह से दूसरी जगह में कुछ मिनट आगे-पीछे का अंतर हो सकता है। इसबार माह-ए-रमजान में पांच जुमा पड़ेगा। पहला जुमा 18 मई को पड़ेगा। दूसरा जुमा 25 मई, तीसरा एक जून, चौथा 8 जून को पड़ेगा। रमजान के अंतिम सप्ताह में चांद नहीं दिखा तो पांचवां जुम्मा 15 जून को पड़ने की संभावना है।

फेसबुक वाट्सएप पर भी छाया रमजान :

सोशल साइट पर भी रमजान की मुबारकबाद का दौर शुरू हो गया है। मक्का-मदीना और इस्लामी चिह्नों के फोटो पर रमजान-उल-मुबारक लिखकर लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं भेज रहे हैं। एक-दूसरे को मुबारकबाद के साथ-साथ रमजान से जुड़ी जानकारियां भी आपस में शेयर की जा रही है।     

तरावीह की नमाज शुरू :

पटना। रमजान चूंकि इबादतों का महीना है और अल्लाह पाक हर नेकी का सवाब सत्तर गुना बढ़ा कर देता है, इसलिए सब ज्यादा से ज्यादा नेकियां कमाने की कोशिश में लग जाते हैं। इस बीच घर-परिवार और कारोबार की मसरूफियत अपनी जगह होती है। रमजान के रोजे के साथ-साथ तरावीह की नमाज का खास महत्व होता है। यह नमाज रात्रि साढ़े आठ बजे के करीब शुरू हो जाती है। रमजान-उल-मुबारक के चांद की खबर मिलते ही तरावीह की नमाज की तैयारी शुरू हो गई। फुलवारीशरीफ, समनपुरा, जामा मस्जिद पटना जंक्शन, जामा मस्जिद कोतवाली, जामा मस्जिद हाईकोर्ट मजार, लान की मस्जिद, सुल्तानगंज, आलमगंज, पटना सिटी सहित शहर की अन्य मस्जिदों में चहल-पहल बढ़ गई है। 

क्या है तरावीह की नमाज

रमजान के पूरे महीने में रोजे के साथ-साथ तरावीह की नमाज पढ़ना भी जरूरी है। इसमें एक हाफिज-ए-कुरआन (जिनको पूरा कुरआन कंठस्त होता है) प्रति दिन कुरआन के एक पारा (अध्याय) की तिलावत (पाठ) करते हैं। आम तौर पर प्रति दिन एक-एक पारा खत्म कर तीस दिनों में पूरा तिलावत-ए-कुरआन मुकम्मल कर लिया जाता है। चूंकि शहर में भाग-दौड़ की जिंदगी होती है। लोगों की व्यस्तताएं अधिक होती हैं। इसलिए लोग कम दिनों की जैसे एक हफ्ते, दस दिनों या पंद्रह दिनों की तरावीह की नमाज का आयोजन करते हैं।