ग्वालियर । विशेष सत्र न्यायाधीश बीपी शर्मा ने एससी-एसटी एक्ट में गलत गिरफ्तारी करने वाले मोहना थाना के टीआई एचएल प्रजापति के खिलाफ अनुशानात्मक कार्रवाई के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है। साथ ही एसएसपी को कार्रवाई की रिपोर्ट यथा शीघ्र कोर्ट में पेश करने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने यह पत्र 24 अप्रैल को दिए फैसले के परिपालन में लिखा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसटी-एसटी एक्ट को लेकर बनाई गई नई गाइड लाइन के उल्लंघन पर विशेष न्यायालय ने पत्र लिखा है।


जगदीश ने मोहना थाने में एक आवेदन दिया कि कासिम उर्फ सोनू खान ने उसके साथ लात-घूसों से मारपीट की और जाति सूचक गालियां दीं। पुलिस ने सोनू के खिलाफ 23 अप्रैल 2018 को धारा 323, 294, 506 व एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया। थाने ने एसएसपी से अनुमति लेने का हवाला देकर उसी दिन गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने केस डायरी के साथ सोनू को 24 अप्रैल को विशेष सत्र न्यायालय में पेश किया।


केस डायरी में बताया गया कि एसएसपी से उसकी गिरफ्तारी की इजाजत ली गई है, उसके बाद गिरफ्तार किया है। केस डायरी के साथ सोनू को 5 मई 2018 तक न्यायिक हिरासत में भेजने के लिए आवेदन भी पेश किया। कोर्ट ने पुलिस की केस डायरी व आवेदन का अवलोकन किया।


पुलिस ने केस डायरी में गिरफ्तारी के जो कारण बताए थे, उन्हें कोर्ट ने आधारहीन माना और केस डायरी के अवलोकन के बाद पाया कि थाना प्रभारी ने सुप्रीम कोर्ट की नई गाइड लाइन का उल्लंघन किया है। क्योंकि जो आधार बताए जा रहे हैं, उन पर आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकती है। 24 अप्रैल के पालन में विशेष न्यायालय ने टीआई के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसएसपी को पत्र लिखा है।


पुलिस ने गिरफ्तारी के बताए थे यह कारण, कोर्ट ने किए खारिज -


- पुलिस ने कहा था कि आरोपी अन्वेषण को प्रभावित कर सकता है। साक्ष्य भी नष्ट कर सकता है। अपराध की पुर्नावृत्ति रोकनी है। जब तक जांच पूरी नहीं होती है आरोपी को 5 मई तक न्यायिक हिरासत में भेजा जाए। कोर्ट ने माना कि अन्वेषण में आरोपी से कोई माल या वस्तु बरामद नहीं होनी है। सिर्फ गालियां दी गई हैं। ऐसी स्थिति में अन्वेषण प्रभावित नहीं हो सकता है।


- पुलिस ने कहा था कि आरोपी को छोड़ दिया जाता है तो वह जांच में सहयोग नहीं करेगा। यानी थाने पर बुलाए जाने पर उसकी उपस्थिति सुनिश्चित नहीं होगी। कोर्ट ने माना कि आरोपी मोहना का ही रहने वाला है। उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। अन्वेषण के दौरान उसकी उपस्थिति आवश्यक नहीं है।


- पुलिस ने कहा था कि फरियादी व आरोपी अलग-अलग धर्मों के हैं। सांप्रदायिक माहौल न बिगड़े, इसलिए गिरफ्तारी की गई है। कोर्ट ने कहा था कि आरोपी व फरियादी अलग धर्मों के हैं। यह गिरफ्तारी का आधार नहीं हो सकता है।