नई दिल्ली ।  सरकार ने इलाहाबाद बैंक की सीईओ और एमडी उषा अनंथसुब्रमण्यम और पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के दो कार्यकारी निदेशकों को हटाने की कार्यवाही शुरू कर दी है। यह कार्यवाही हीरा कारोबारी नीरव मोदी के साथ मिलकर 2 बिलियन डॉलर के फ्रॉड में शामिल होने के संबंध में की जा रही है। गौरतलब है कि पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में नीरव मोदी और मेहुल चौकसी (गीतांजलि जेम्स के प्रमुख) मुख्य आरोपी हैं।

सरकार की ओर से यह कदम सीबीआई की ओर से इस मामले में पहली चार्जशीट दाखिल करने के बाद आया है। देश के सबसे बड़े वित्तीय घोटाले के संबंध में पीएनबी के बोर्ड ने अपने दो कार्यकारी अधिकारियों के वी ब्रह्माजी राव और संजीव शरण से सभी वित्तीय और कार्यकारी अधिकार वापस ले लिए हैं। वहीं इलाहाबाद बैंक का बोर्ड आज अपनी सीईओ और एमडी उषा अनंथसुब्रमण्यम से सभी अधिकार वापस ले सकता है। वो बीते साल 5 मई तक बैंक की मैनेजिंग डायरेक्टर रही थीं। आपको बता दें कि पीएनबी घोटाले की शुरुआत साल 2011 में हुई थी और यह घोटाला साल 2018 में खुलकर सामने आया।

इससे पहले पीएनबी बोर्ड ने सरकार की ओर से नामित डायरेक्टर के निर्देश पर एक आपात बैठक बुलाई थी। बीएसई स्टॉक एस्कचेंज में की गई फाइलिंग में पीएनबी ने बताया, “इस मामले में हालिया डेवलपमेंट को देखते हुए इस बैठक में यह फैसला किया गया है कि कार्यकारी निदेशक केवी ब्रह्माजी राव और संजीव शरण से सभी अधिकार वापस ले लिए जाएं और वित्तीय सेवाओं विभाग से उनके प्रतिस्थापन की मांग की गई है।”

सीबीआइ ने पीएनबी घोटाले में गिरफ्तार आरोपितों की रिहाई रोकने के लिए पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले में नीरव मोदी और उसकी कंपनियों के साथ-साथ पंजाब नेशनल बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को आरोपित किया गया है। आरोपपत्र में पीएनबी की तत्कालीन एमडी और सीईओ उषा अनंतसुब्रमण्यन की भूमिका का विस्तार से जिक्र किया गया है। वर्तमान में उषा इलाहाबाद बैंक की एमडी और सीईओ हैं। फिलहाल मेहुल चोकसी और उसकी कंपनियों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।

सीबीआइ का कहना है कि घोटाले में आरबीआइ के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। मुंबई की विशेष अदालत में सोमवार को दाखिल चार्जशीट के अनुसार, नीरव की कंपनियों को बिना किसी मंजूरी और बिना किसी गारंटी के लेटर आफ अंडरस्टैंडिंग (एलओयू) जारी करने में पीएनबी के ऊपर से नीचे तक सभी अधिकारी शामिल थे।

सीबीआइ ने उषा अनंतसुब्रमण्यन से लेकर सिंगल विंडो ऑपरेटर मनोज करात समेत बैंक के कुल 12 अधिकारियों और कंपनियों को आरोपित किया है। चार्जशीट में नीरव मोदी, उसके भाई निशाल मोदी, उसकी तीन कंपनियों, इन कंपनियों में काम करने वाले सात अधिकारियों पर आरोप लगाया गया है। इन कंपनियों को 6,500 करोड़ रुपये का एलओयू जारी किया गया था। मेहुल चोकसी की कंपनियों की खिलाफ चार्जशीट बाद में दाखिल की जाएगी।