नई दिल्ली । देना बैंक के बाद अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) मैकेनिज्म के अंतर्गत संपत्ति की खराब गुणवत्ता के कारण अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर कुछ प्रतिबंध लगा सकता है। यह जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है।

बढ़ती गैर-निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) के मद्देनजर आरबीआई ने देना बैंक को निर्देश दिया है कि वो कोई नया कर्ज न दे और न ही किसी नए कर्मचारी को भर्ती करे। 21 सरकारी बैंकों में से करीब 11 बैंक ऐसे हैं जो अपनी कमजोर वित्तीय स्थिति के चलते रिजर्व बैंक के पीसीए के अधीन हैं। वहीं एक या दो अन्य बैंक भी पीसीए के अधीन आ सकते हैं। यह उस सूरत में होगा अगर उनके तिमाही नतीजे पूंजीगत क्षय और शुद्ध एनपीए में अप्रत्याशित वृद्धि को दर्शाते हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि आरबीआई जोखिम मूल्यांकन के आधार पर निर्णय लेता है कि वह बैंक पर किस तरह का प्रतिबंध लगाए। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि 12 फरवरी को आरबीआई की ओर से जारी किए गए नए दिशानिर्देशों ने समस्याओं में और इजाफा किया है। बीते साल जारी किए गए रिवाइज्ड पीसीए दिशानिर्देशों के मुताबिक अगर बैंक रिस्क थ्रैसहोल्ड3 में प्रवेश करता है तो वह एकीकरण, पुर्ननिर्माण और खत्म किए जाने के पात्र हो सकता है। पीसीए के अंतर्गत बैंकों को लाभांश और मुनाफा वितरित करने में प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। मालिक को बैंक में और पूंजी निवेश करने के लिए कहा जा सकता है।