लाहौर  मुंबई आतंकी हमले में पाकिस्तान का हाथ होने की बात कबूलने के एक दिन बाद पूर्व पीएम नवाज शरीफ अपने बयान से पलट गए। इस कबूलनामे से घर में ही चौतरफा घिरने के बाद रविवार को शरीफ ने कहा कि मीडिया ने उनके बयान की गलत व्याख्या की। 

शरीफ के प्रवक्ता ने यहां जारी बयान में कहा, ‘शुरुआत में भारतीय मीडिया ने शरीफ के बयान की गलत ढंग से व्याख्या की। यह अफसोसजनक है कि पाक के इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के एक वर्ग ने जाने-अनजाने में न सिर्फ इसे सही ठहराया बल्कि पूरे बयान के तथ्यों को जाने बगैर भारतीय मीडिया के दुर्भावनापूर्ण प्रचार में आकर अपनी साख को भी घटा लिया।’


प्रवक्ता ने कहा कि पाक की सबसे लोकप्रिय राष्ट्रीय पार्टी पीएमएल-एन और इसके सबसे बड़े नेता को पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाने, संरक्षित और सुरक्षित करने में अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाने के लिए किसी से प्रमाणपत्र लेने की आवश्यकता नहीं है। यह तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ ही थे, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी पाक की राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सबसे कठिन फैसला लेते हुए मई 1998 में परमाणु परीक्षण को मंजूरी दी। 


दरअसल, डॉन को दिए एक इंटरव्यू में शरीफ ने 26/11 के मुंबई हमले में पाक का हाथ होने की बात कबूल करने के साथ-साथ उनके यहां इस मामले की धीमी चल रही सुनवाई को लेकर भी सवाल उठाए थे। इसके बाद से विपक्षी दल और उनकी अपनी पार्टी के कुछ असंतुष्ट नेता शरीफ पर हमलावर हैं।


शरीफ ने पहली बार माना था कि पाक में आतंकी संगठन सक्रिय हैं। उन्होंने ‘नॉन स्टेट एक्टर्स’ यानी सरकार से इतर तत्वों को सीमा पार कर मुंबई में लोगों की हत्या करने की इजाजत देने की नीति पर सवाल उठाए थे। पनामा पेपर लीक के बाद चुनाव लड़ने के लिए आजीवन प्रतिबंध का सामना कर रहे पाक के पूर्व पीएम ने कहा था कि पाक ने खुद को अलग-थलग कर लिया है।