देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट, दुनिया की तीसरी बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी वॉलमार्ट के हाथों बिकने जा रही है। मगर इस सौदे से पहले वह अपने से छोटी कंपनियों को खुद में समा लेने की जैसी जिद ठाने हुए थी। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह अब तक 13 कंपनी का अधिग्रहण कर चुकी है या उनके अधिकांश शेयर अपने नाम कर चुकी है । हैरत की बात तो यह है कि कंपनियों के इस अधिग्रहण का सिलसिला उसने स्थापना के तीन साल बाद यानी 2010 में ही शुरू कर दिया था। इतना ही नहीं तीन बड़ी कंपनियों को तो फ्लिपकार्ट ने अमेजन के भारत आने के बाद खरीदा है। ये मिंत्रा, जबॉन्ग तथा ईबे इंडिया हैं। वैसे वह स्नैपडील को खरीदने के प्रयास भी कर चुकी है। फ्लिपकार्ट उसके मालिकों को 70 से 80 करोड़ डॉलर (4500 करोड़ से 5000 करोड़ रुपए) के बीच देना चाहती थी। वहीं कभी छह अरब की कीमत रखने वाली स्नैपडील के मालिक कम से कम 1 अरब डॉलर चाहते थे। ऐसे में ये डील नहीं हो सकी। इधर अमेजन भारत की अपनी इकाई में पिछले 4 साल में 19511 करोड़ रुपए का निवेश कर चुका है। 


इतने अधिग्रहण कर चुकी है फ्लिपकार्ट 


दिसंबर 2010 


सबसे पहले किताबों की जानकारी देने और रिव्यू करने वाले प्लेटफॉर्म ‘वीरीड.कॉम’ को खरीदा। 


अक्टूबर 2011 


डिजिटल म्यूजिक स्टोर ‘माइम-360’ को खरीदा। यहां नकद के साथ स्टॉक डील भी हुई। 


नवंबर 2011 


बॉलीवुड न्यूज साइट ‘चकपक.कॉम’ का अधिग्रहण किया। 


फरवरी 2012 


तब देश के दूसरे सबसे बड़े ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेलर रहे ‘लेट्सबाय.कॉम’ का अधिग्रहण किया। 


मई 2014 


30 करोड़ डॉलर में अॉनलाइन लाइफस्टाइल रिटेलर मिंत्रा को खरीदा। 




सितंबर 2014 


एनजीपे नामक पेमेंट प्लेटफॉर्म के ज्यादातर शेयर खरीद लिए। 


अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट ने भारत की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट की 77% हिस्सेदारी खरीदने की डील की है। डील पूरी हुई तो देश में ई-कॉमर्स की दौड़ में शामिल दोनों बड़ी कंपनियां अमेरिका की होंगी। दूसरी कंपनी अमेजन है। बाकी इनके मुकाबले दूर-दूर तक नहीं हैं। मगर अब तो अमेजन भी फ्लिपकार्ट से आगे निकलने के लिए संघर्ष कर रही है। 


नवंबर 2014 


जीव्स नामक कस्टमर सर्विस के अधिकांश शेयर खरीद लिए। 


मार्च 2015 


मोबाइल एडवर्टाइजिंग कंपनी एडइक्विटी को खरीदा। 


अप्रैल 2015 


मोबाइल मार्केटिंग फर्म ‘एपइटरेट’ का अधिग्रहण किया। 


सितंबर 2015 


पेमेंट सुविधा देने वाले स्टार्टअप ‘एफएक्स मार्ट’ को खरीदा। 


अप्रैल 2016 


यूपीआई आधारित पेमेंट स्टार्टअप ‘फोन पे’ का अधिग्रहण किया। 


जुलाई 2016 


7 करोड़ डॉलर में जबॉन्ग को खरीदा। 


अप्रैल 2017 


ईबे ने 50 करोड़ डॉलर के निवेश के साथ फ्लिपकार्ट को ईबे इंडिया बेच दिया। 


ये हैं देश की शीर्ष 5 ई कॉमर्स कंपनियां 


ये हैं शीर्ष 5 ग्लोबल ई-कॉमर्स कंपनियां 


अमेजन, अमेरिका 


अलीबाबा, चीन 


वॉलमार्ट, अमेरिका 


ओट्‌टो, जर्मनी 


जेडी, ब्रिटेन 


ऑनलाइन बाजार में किसकी कितनी हिस्सेदारी 


23.9% 


अन्य 


5% 


5% 


स्नैपडील 


स्नैपडील 


5.6% 


5.6% 


मिंत्रा 


मिंत्रा 


1. फ्लिपकार्ट 


शुरुआत: 2007 में 


संस्थापक: सचिन बंसल तथा बिन्नी बंसल 


ऑर्डर: 5 लाख रोजाना 


सचिन तथा बिन्नी बंसल ने बेंगलुरु से अॉनलाइन बुक स्टोर की शुरुआत की तो पहला ग्राहक महबूबनगर (तेलंगाना) में मिला। मुसीबतों के बावजूद ये इस साल 20 अॉर्डर डिलीवर करने में सफल रहे थे। 


2. अमेजन इंडिया 


शुरुआत: 2013 से 


संथापक: जेफ बेजॉस 


ऑर्डर: 4.5 लाख रोजाना 


4. मिंत्रा 


शुरुआत: 2007 से 


सीईओ:अनंत नारायण 


ऑर्डर: 45 से 50 हजार रोजाना 


32% 


फ्लिपकार्ट 


31% 


अमेजन इंडिया 


16% 


पेटीएम मॉल 


3. पेटीएम मॉल 


शुरुआत: 2017 से 


संथापक: वीएस शर्मा 


ऑर्डर: 50 से 55 हजार रोजाना 


5. स्नैपडील 


शुरुआत: 2010 में 


संथापक: कुणाल बहल तथा रोहित बंसल 


ऑर्डर: रोज 45 हजार 


इन कंपनियों के लिए आगे क्या उम्मीद? 


भारत में ई-कॉमर्स मार्केट फिलहाल 2.2 लाख करोड़ रुपए का है। यानी पूरे रिटेल मार्केट का महज 4.5 फीसदी हिस्सा। मगर अमेरिका की मार्केट रिसर्च कंपनी के अनुसार यह 2022 तक 73 अरब डॉलर को पार कर जाएगा। और तब यह रिटेल मार्केट का 5.7 फीसदी होगा। यानी में ई-कॉमर्स में अभी काफी गुंजााइश है। 


77 से 55 फीसदी न रह जाए वॉलमार्ट की हिस्सेदारी 


अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट ने बुधवार 9 मई को फ्लिपकार्ट की 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की अपनी योजना का खुलासा किया था। इसे कंपनी के शेयरहोल्डर्स के लिए भी एक बड़ी खुशखबरी के तौर पर देखा गया। इसलिए कि फ्लिपकार्ट पिछले कुछ समय से गिरावट का दौर देख रही थी। मॉर्गन स्टैनली ने तो 2016 में फ्लिपकार्ट का वैल्यूएशन 2015 के 15.2 अरब डॉलर के मुकाबले घटाकर 5.54 अरब डॉलर कर दिया था। निवेशक तथा कंपनी के कर्मचारी इससे चिंतित थे। इसी बीच कंपनी को वॉलमार्ट से ऑफर मिला, जिसे उसकी वैल्यूएशन को 2.8 अरब डॉलर आंका। इससे ये भी उम्मीद जागी कि इस बड़ी डील का कुछ न कुछ हिस्सा सभी शेयरधारकों को मिलागा, लाभ की राशि कर्मचारियों के हिस्से में भी आएगी। हालांकि अब फ्लिपकार्ट की सबसे बड़ी निवेशक जापानी कंपनी सॉफ्टबैंक अपनी 22% हिस्सेदारी वॉलमार्ट को बेचने पर असमंजस में है। वह इस हिसाब-किताब में व्यस्त है कि उसे हिस्सेदारी बेचने पर कितना टैक्स देना पड़ सकता है। वह इस मंथन में भी है कि फ्लिपकार्ट ने भविष्य में अच्छी ग्रोथ की तो उसका शेयर बेचने का फैसला गलत साबित हो सकता है। इससे यह डील संकट में फंस सकती है। क्योंकि सॉफ्टबैंक सौदे से पीछे हटा तो वॉलमार्ट सिर्फ 55 फीसदी हिस्सेदारी का ही सौदा करेगा। 


अमेजन ने फ्लिपकार्ट को खरीदने के तीन मौके गंवाए 


वॉलमार्ट से के साथ अमेजन भी फिल्पकार्ट को खरीदने की दौड़ में शामिल था। उसने वॉलमार्ट की 20.8 अरब डॉलर (1.39 लाख करोड़ रुपए) की तुलना में फ्लिपकार्ट की वैल्यू 22.5 अरब डॉलर आंकी थी। मगर रेगुलेटर्स की ओर से क्लीयरेंस की आसानी को देखते हुए फ्लिपकार्ट ने वॉलमार्ट से करार किया। अमेजन ने भारत आने से पहले 2012 में भी फ्लिपकार्ट को खरीदने का प्रयास किया था। तब 50 से 70 करोड़ डॉलर की पेशकश की थी। भारत आने के बाद 2015 में भी अमेजन 8 अरब डॉलर में फ्लिपकार्ट को खरीदने की इच्छा जताता रहा। हालांकि हर बार नाकाम रहा। 


अब तक इन्हें माना जाता है ई-कॉमर्स की सबसे बड़ी डील 


2017:में पालतु जानवरों से जुड़े प्रोडक्ट बेचने वाली फ्लोरिडा (अमेरिका) की ई-कॉमर्स कंपनी को एरिजोना (अमेरिका) की पेटस्मार्ट कंपनी ने खरीदा था। 


यह सौदा 3.35 अरब डॉलर में हुआ था। 


2016: में वॉलमार्ट ने अमेरिका की ही ई-कॉमर्स फर्म जेट.कॉम को खरीदा था। 


यह सौदा 3.30 अरब डॉलर में हुआ था। 


1999: में अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी सेप एरिबा ने ई-कॉमर्स कंपनी ट्रेडेक्स को खरीदा था। 


यह सौदा 1.86 अरब डॉलर में हुआ था। 


2000: में लिटावर टेक्नोलॉजीस ने एशियानेट के ई-कॉमर्स बिजनेस का अधिग्रहण किया था। 


यह सौदा 1.20 अरब डॉलर में हुआ था। 


2009: में अमेरिकी कंपनी अमेजन ने यहीं के एक ऑनलाइन फैशन ब्रैंड जेपोस.कॉम को खरीदा। 


यह सौदा 1.13 अरब डॉलर में हुआ था।