फर्स्ट क्लास क्रिकेट में शानदार रिकॉर्ड रखने वाले तमिलनाडु के बल्लेबाज सुब्रमण्यम ब्रदीनाथ जल्द ही इस खेल के सभी फॉर्मेट्स से संन्यास लेने वाले हैं। सुब्रमण्यम ब्रदीनाथ ने घरेलू क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन किया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें वो मुकाम नहीं मिल सका जिसके वो हकदार थे। दरअसल, इसके पीछे वजह मौकों का ना मिलना और जो मौके मिले उनमें अपने प्रदर्शन से प्रभाव ना छोड़ पाना रहा। सुब्रमण्यम ब्रदीनाथ ने टीम इंडिया के लिए 2 टेस्ट , 7 वनडे और एक टी-20 मुकाबला खेला, जिसमें उन्होंने क्रमश: 63, 79 और 43 रन बनाए। बद्रीनाथ ने अगस्त 2008 में श्रीलंका के खिलाफ वन-डे और फरवरी 2010 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू किया था।

घरेलू क्रिकेट में शानदार रहा है सुब्रमण्यम बद्रीनाथ का प्रदर्शन

घरेलू क्रिकेट के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में शुमार सुब्रमण्यम बद्रीनाथ ने 145 फर्स्ट क्लास मैचों में 32 शतकों और 45 अर्धशतकों के साथ कुल 10245 रन बनाए। आईपीएल में बद्रीनाथ कमेंटेटर की भूमिका निभा रहे हैं। पिछले साल रणजी ट्रॉफी में भी वो नहीं खेले थे, हालांकि तब उन्होंने संन्यास लेने की बातों को खारिज कर दिया था। 37 साल के बद्रीनाथ आईपीएल में चेन्नई सुपरकिंग्स के लिए खेल चुके हैं। उन्होंने आईपीएल में कुल 95 मैचों की 67 पारियों में 1441 रन बनाए हैं, जिसमें उनके नाम 11 अर्धशतक दर्ज हैं। सुब्रमयण्म ब्रदीनाथ ने 2014 तक तमिलनाडु रणजी टीम की ओर से क्रिकेट खेला, फिर 2014 से 17 रणजी सीजन तक दूसरे राज्यों के लिए खेले। उन्होंने 2014 से 16  तक विदर्भ की कप्तानी की, जबकि 2016 में हैदराबाद के लिए भी खेले।


एस बद्रीनाथ का चयन ना करने पर दिलीप वेंगसरकर को गंवाना पड़ा था पद

गौरतलब है कि टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और बीसीसीआई सलेक्शन कमिटी के पूर्व चेयरमैन दिलीप वेंगसरकर ने कुछ दिनों पहले खुलासा किया था कि साल 2008 में तत्कालीन कप्तान महेंद्र सिंह धौनी और कोच गैरी कर्स्टन इस पक्ष में नहीं थे कि विराट कोहली को टीम में शामिल किया जाए। दिलीप वेंगसरकर ने दावा था कि उन्हें मुख्य चयनकर्ता के पद से सिर्फ इसलिए हटना पड़ा था क्योंकि उन्होंने सुब्रमण्यम ब्रदीनाथ की जगह विराट कोहली को टीम में स्थान दिया था। सुब्रमण्यम ब्रदीनाथ तक आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स टीम की ओर से खेलते थे, जो पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन की टीम थी। श्रीनिवासन ने वेंगसरकर के इस चयन से नाखुशी जाहिर की थी और कुछ दिन बाद ही उन्हें मुख्य चयनकर्ता पद से हटने के लिए कह दिया गया था।