बिलासपुर। सिम्स में गुरुवार को प्रसव के बाद परिजन को नवजात के स्वस्थ होने की बात कही गई। इसके बाद सात घंटे तक बच्चे की कोई जानकारी नहीं मिली। हंगामा होने पर स्टाफ ने उसके एनआइसीयू में भर्ती होने की बात कही। वहीं परिजन बच्चे के बदलने की आशंका जता रहे हैं।


जयरामनगर के ग्राम भनेसर निवासी अनिता निषाद पति प्रदीप निषाद को गुरुवार की दोपहर 12 बजे प्रसव पीड़ा उठने लगी। उस वक्त अनिता अपने मायके मलडीह में थी। उसकी मां कुमारी बाई निषाद और मितानिन रामकली उसे लेकर सिम्स पहुंचीं। शाम चार बजे उसने बच्चे को जन्म दिया।


तब प्रसूता की मां को स्टाफ ने बच्चे को एनआइसीयू के शिशु रोग विशेषज्ञ को दिखाने को कहा गया। डॉक्टर ने बताया कि बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ्य है। कुछ देर बच्चे को जांच के लिए रख रहे हैं। पांच बजे परिजन ने नर्स से बच्चे के बारे में पूछा। उन्हें बताया गया कि बच्चे परिजन को दे दिया गया है।


इस पर प्रदीप व उसकी सास ने बताया उनके अलावा कोई परिजन नहीं है। इसके बाद भी नर्स बच्चे को परिजन को सौंपने की बात दोहराती रही। इसके बाद सात घंटे तक परिजन को घुमाया गया। इधर परिजन ने हंगामा शुरू कर दिया।


दबाव बनने पर अचानक स्टाफ ने बताया कि बच्चे की हालत खराब है। उसे एनआइसीयू में रखा गया है। इसके बाद बच्चा परिजन को दिखाया गया। हालांकि पिता बच्चे को लेकर संशय में है। उसका कहना है कि बच्चा एनआइसीयू में था तो परिजन से झूठ क्यों बोला गया। उसने अपने स्वस्थ बच्चे को किसी ओर से बदलने की आशंका जताई है।


मितानिन ने भी नहीं पहचाना


प्रसव के बच्चे को महिला की मां व मितानित रामकली ने देखा था। अब मितानिन एनआइसीयू में भर्ती बच्चे को देखकर पहचान नहीं कर पा रही है। इसकी वजह से परिजन संशय में हैं।


मां भी नहीं देखा


प्रसव के बाद बच्चे की मां को वार्ड में शिफ्ट कर दिया है। वह काफी कमजोर हो गई है। दवाओं के असर के कारण नींद में भी है। इसलिए मां बच्चे को ठीक से नहीं देख पाई है।


बच्चा बदलने जैसी बात नहीं है। जन्म होने के साथ ही नवताज को टैग लगाया जाता है। बच्चे की हालत गंभीर है। इसलिए एनआइसीयू में रखा गया है। - डॉ. बीपी सिंह, प्रभारी एमएस, सिम्स