कर्नाटक में राजनीतिक दलों ने अपनी बात रख दी है और अब मतदाताओं के फैसले पर नजर होगी। तीखे आरोप-प्रत्यारोप के बीच जाति, धर्म, क्षेत्रियता और विकास के मुद्दों में किसने वोटर को प्रभावित किया यह तय होगा शनिवार को मतदान से और मंगलवार को फैसला हो जाएगा कि भाजपा एक और राज्य फतह करेगी या कांग्रेस अपना किला बरकरार रख पाएगी। अाइए जानते हैं कि भाजपा, कांग्रेस और जद-एस की क्या ताकत है और क्या कमजोरी।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)


कर्नाटक दक्षिण का इकलौता राज्य है जहां भाजपा सत्ता का स्वाद चख चुकी है। पांच साल की सत्ता के दौरान यहां के तीन मुख्यमंत्री येदियुरप्पा, जगदीश शेट्टार और डी सदानंद गौड़ा रहे चुके हैं।


ताकत


- मोदी लहर बरकरार, कम से कम शिक्षित वर्ग और बंगलूरू जैसे मेट्रो शहर में।

- भाजपा सरकार के दौरान ज्यादा सांप्रदायिक घटनाएं न होना और कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहतर होना।

- भ्रष्टाचार के कई आरोपों से घिरे येदियुरप्पा और उनके सहयोगियों शोभा करंदलेजे, सुरेश कुमार, आर अशोक की छवि अच्छे प्रशासक की रही है।

- ब्यूरोक्रेसी भी भाजपा सरकार से खुश थी क्योंकि राजनेताओं का ज्यादा दखल नहीं था।


कमजोरी


- येदियुरप्पा की उम्र 75 साल होने, भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जाना और कई मामलों में अभी आरोपी होना।

- खनन माफिया कहलाने वाले रेड्डी भाइयों और रिश्तेदारों को आठ टिकट देना, येदियुरप्पा के साथ मंच साझा करना।

- शोभा करंदलेजे और येदियुरप्पा के बेटे विजयेंद्र को टिकट न देने से पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष।

- भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जाने वाले नेताओं के. सुब्रमण्यम नायडू और रेणुकाचार्य को टिकट देना।

- विधानसभा में पॉर्न वीडियो देखते पकड़े गए नेताओं को दोबारा चुनाव लड़ाना।

- प्रचार में किसी मजबूत स्थानीय चेहरे का न होना और मोदी-शाह का हिंदी में भाषण देना।

- सुषमा स्वराज जैसी नेताओं की जगह कट्टर हिंदूवादी छवि के योगी आदित्यनाथ से राज्य में प्रचार करवाना।

- अनंत कुमार हेगड़े जैसे नेताओं का आए दिन बेतुके बयान देना।

- कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार के खिलाफ कोई महत्वपूर्ण घोटाला या भ्रष्टाचार सामने न ला पाना।

कांग्रेस की ताकत और कमजोरी

कांग्रेस


कांग्रेस यदि चुनाव जीत जाती है तो यह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए एक बड़ी कामयाबी साबित होगी। वहीं सिद्धारमैया इस वक्त कर्नाटक के मुख्यमंत्री हैं जिनकी छवि अन्य सरकार की तुलना में बेहतर बताई जा रही है।


ताकत


- सिद्धारमैया की येदियुरप्पा की तुलना में ज्यादा स्वच्छ छवि होना।

- अन्न भाग्य, अरोग्य भाग्य जैसी जनहितैषी योजनाएं लाना।

- सोशल मीडिया पर प्रभावकारी प्रचार अभियान चलाना।

- जमीनी सतर पर कार्यकर्ताओं से सिद्धारमैया के रिश्ते अच्छे होना।

- पार्टी संगठन और सरकार के बीच मतभेद न होना।

- लिंगायत को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने का फैसला।

- उम्मीदवारों का चयन बिना किसी विवाद के होना।

- राहुल गांधी द्वारा प्रदेश पार्टी नेतृत्व को पूरी आजादी देना।


कमजोरी


- मैसूरू-मंड्या बेल्ट पर ज्यादा ध्यान देना और सिद्धारमैया पर बंगलूरू को नजरअंदाज करने का आरोप लगा होना।

- मंत्रियों, विधायकों के बेटों और बेटियों को टिकट देना, वंशवाद को बढ़ावा देने का आरोप।

- टिकट न मिलने पर अंतिम समय में कई प्रमुख पार्टी नेताओं द्वारा दलबदल किया जाना।

- खराब मीडिया प्रबंधन का होना।

जद-एस की ताकत और कमजोरी

जद-एस


जद-एस की बात करें तो एचडी कुमारस्वामी पार्टी की तरफ से प्रमुख प्रचारक हैं। पार्टी का जोर वोक्कालिगा बहुल्य सीटों पर ज्यादा है। चुनाव विश्लेषक जद-एस को ज्यादा भाव नहीं दे रहे हैं लेकिन त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में पार्टी किंगमेकर बन सकती है।


ताकत


- देवगौड़ा का एक मजबूत समर्थक तबके का होना, खासकर वोक्कालिगा समुदाय के बीच।

- ग्रामीण युवाओं में मजबूत पैठ का होना।

- कुमार स्वामी के शासन के दौरान फायदा उठाने वाली बिजनेस लॉबी का समर्थन।


कमजोरी


- त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में किस पाले में जाने को लेकर अस्पष्टता।

- पिता-पुत्र भाजपा को समर्थन देने या लेने पर अलग-अलग राय रखते हैं।

- मोदी या सिद्धारमैया पर हमले को लेकर भ्रम की स्थिति होना।