शुक्रवार की शाम 06:13 पर सूर्यदेव कृतिका नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। वह इस नक्षत्र में 25 मई की दोपहर 02:21 तक रहेंगे। कृतिका नक्षत्र स्वयं सूर्यदेव का नक्षत्र है और सूर्यदेव व्यक्ति के अंदर विवेक को जागृत करते हैं, उसके मनोबल को बढ़ाते हैं। साथ ही सूर्यदेव के प्रमुख तत्वों में एक अग्नि है। अतः कृतिका नक्षत्र के दौरान अग्नि से संबंधित कार्य करना बड़ा ही फलदायी साबित होता है।

वैदिक ज्योतिष में इस नक्षत्र के देवता अग्नि को और स्वामी सूर्य को माना जाता है। वैदिक ज्योतिष में कृतिका नक्षत्र को ब्राहमण वर्ण का माना जाता है क्योंकि इस नक्षत्र में जन्मा जातक जन कल्याण के ही काम करता है।

जबकि इस नक्षत्र को राक्षस गण का माना जाता है क्योंकि यह नक्षत्र किसी न किसी प्रकार से युद्ध के साथ जुड़ा हुआ है। कृतिका का गुण राजसिक माना जाता है क्योंकि इस पर राजसिक ग्रह सूर्य का प्रभाव है और यह नक्षत्र पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करता है।

कैसे होते हैं इस नक्षत्र में जन्मे जातक

कृतिका नक्षत्र में जन्मा जातक सुन्दर और गुणी होता है। इनका व्यक्तित्व राजा की तरह होता है क्योंकि ग्रहों के राजा सूर्य का प्रभाव होता है। साथ ही व्यक्ति तेजस्वी और तेज बुद्धि का होता है। बचपन से ही आपकी विद्या प्राप्ति में अधिक रुचि रहती है और आगे चलकर कृतिका नक्षत्र का जातक विद्वान होता है।

सूर्य के इस नक्षत्र में चन्द्रमा भी रहेगा, जिससे सूर्य और चन्द्र के मेल के कारण शरीर पर तेज की अनुभूति होगी।चन्द्रमा से प्रभावित होने के कारण आपमें प्रभुत्व आएगा। चन्द्रमा के प्रभाव के कारण ही ऐसे जातकों के पास धन आता है।

जन्म स्थान से दूर होता है भाग्योदय

कृतिका नक्षत्र में जन्मे जातक का भाग्योदय अक्सर जन्म स्थान से दूर जाकर होता है। कृतिका नक्षत्र में जन्म लेने वाला व्यक्ति खाने का शौकीन और अन्य स्त्रियों में आसक्त होता है। इन्हें गायन, नृत्यकला, सिनेमा, युद्धकला में अधिर रुचि होती है

कृतिका नक्षत्र में जन्मी महिलाएं पतले दुबले शारीर और कफ प्रकृति की होती हैं। सामान्यतः अपने माता पिता की अकेली संतान होती हैं। यदि भाई-बहन हुए भी तो उनके सुख से वंचित रहती हैं। इस नक्षत्र में जन्मी जातिकाएं झगड़ालू तथा दूसरों में दोष निकलने वाली होती हैं, जिसकी वजह से जीवनसाथी से भी संबंध ठीक नहीं रहते हैं। इन्हें गुस्सा बहुत आता है।