छत्तीसगढ़ में बिलासपुर हाईकोर्ट ने विभाग द्वारा शिक्षाकर्मी को सेवा से हटाए जाने के आदेश को निरस्त कर दिया है. साथ ही सचिव पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग को कड़ा निर्देश जारी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जो भी अधिकारी पंचायत सेवा अपील और अधिनियम की धारा 1999 का उल्लंघन करेगा, उसके ऊपर विभाग द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.


बता दें कि जनपद पंचायत साजा के अंतर्गत आने वाले स्थायी कर्मचारी रोहिणी झा और दमेश्वरी ने हाईकोर्ट में अधिवक्ता अजय श्रीवास्तव के माध्यम से याचिका लगाई थी. याचिका में कहा गया था कि उनकी नियुक्ति उनके सारे नियम के साथ किया गया था. नियुक्ति के 7 साल बाद उन्हें सिर्फ नोटिस जारी कर यह कहा गया कि उनके द्वारा दस्तावेजों में से अंक सूचि के मूल्यांकन की छायाप्रति में गड़बड़ी है.


याचिकाकर्ता के अनुसार 7 साल बाद मूल्यांकन छायाप्रति में गड़बड़ी होने की जानकारी दी गई, जो गलत है. नियुक्ति के पहले सभी दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद नियुक्ति दी जाती है. अगर अंक सूचि में कुछ गड़बड़ी होने की बात होती, तो उन्हें पहले ही जानकारी दे देनी चाहिए थी. अब जबकि 7 साल बीत गए हैं, तब सिर्फ नोटिस जारी कर बर्खास्त कर देना विधि विरुद्ध है, जबकि सेवा से निकालने से पहले नियम 7 पंचायत सेवा अपील एवं अनुशासन नियम की धारा 1999 के तहत विभागीय जांच की जानी चाहिए थी. हालांकि विभाग द्वारा सीधे नोटिस जारी कर बर्खास्त कर दिया गया, जो विधि के नियम के विपरीत है.


याचिकाकर्ता की तर्क को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए पहले तो उनके बर्खास्तगी के आदेश को निरस्त कर दिया. इसके बाद विभाग को सख्त निर्देश दिया कि नियम के विरुद्ध किसी भी अधिकारी द्वारा स्थाई कर्मचारी की बर्खास्तगी की जाती है, तो उस अधिकारी के खिलाफ विभाग द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए.