छत्तीसगढ़ में कवर्धा जिले के वनांचल में पानी की समस्या दूर होने का नाम नहीं ले रही है. सरकार बैगा आदिवासियों को मूल निवासी और विशेष संरक्षित वर्ग मानकर पानी की तरह पैसा बहा रही है. बावजूद इसके सरकार बैगा आदिवासियों की पानी की समस्या दूर नहीं कर पा रही है. बता दें कि इसमें सबसे ज्यादा दिक्कत पंडरिया विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिल रही है.


इधर, सरकारी अमला से कुछ पूछे जाने पर वे दुर्गम क्षेत्र का हवाला देकर बोर न होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं. ऐसे में यहां रहने वाले बैगा आदिवासियों को इस परेशानी से दो-चार होना पड़ता है. किसी तरह गांव से कई किलोमीटर दूर झिरिया का पानी पीकर ये अपनी प्यास बुझा रहे हैं.


वहीं जनप्रतिनिधियों को भी इनकी समस्या से कोई सरोकार नहीं है. वे तो अपने आलीशान बंगले में मस्त हैं, लेकिन उनके क्षेत्र की जनता इस भीषण गर्मी में पानी के लिए चिलचिलाती धूप में यहां वहां भटक रहे हैं.

इस पर कांग्रेस ने तो प्रदेश सरकार पर 14 साल के विकास पर ही सवाल खड़ा कर दिया है. मामले में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कुंद माधव कश्यप का कहना है कि वनांचल क्षेत्रों में हर साल सरकार शुद्ध पेयजल पहुंचाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन अखबारों और टीवी चैनलों के माध्यम से पता चलता है कि वहां आज भी वहां स्थिति जस की तस बनी हुई है. आज भी वहां के लोग झिरिया का ही पानी पीने को मजबूर हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है.

वहीं क्षेत्रीय विधायक और संसदीय सचिव मोतीराम चंद्रवंशी ने बोरवेल फेल होने के चलते झिरिया को ही पक्का करने की बात कही है.