बुधवार दिनांक 25.04.18 को धनु राशि, दशमी तिथि व मूल नक्षत्र के साथ-साथ गजकर्ण और वृद्धि योग है। बुधवार व केतु का नक्षत्र मूल आद्य शक्ति मूल प्रकृति देवी को समर्पित है। आज के योग में महादेवी के देवी गोमती के स्वरूप का पूजन करना अच्छा रहेगा। देवी भागवत पुराण के अनुसार शक्ति-पीठों की संख्या 108 हैं। देवी भागवत में वर्णित, राजा जन्मेजय द्वारा पूछे जाने पर व्यास जी द्वारा जिन 108 शक्ति पीठों का वर्णन किया गया उनमें से गोमती शक्ति पीठ सातवें स्थान पर है। देवी गोमती शक्ति पीठ गोमान्त में स्थित है। शास्त्रों ने गोमान्त क्षेत्र को क्राचांच द्वीप कहा है। इस शक्ति पीठ का वर्णन महाभारत में आया है। 


गोमान्त राज्य वर्तमान में भारत के पश्चिमी तट गोवा राज्य में स्थित है। महाभारत में गोमान्त को यदुवंश के साम्राज्य द्वारका का विस्तार कहा है। गोमान्त शक्ति पीठ का उल्लेख प्राचीन भारत के साथ मंडक, शांड, विदर्भ के साथ किया है। मग्ध के राजा जरासंध के निरंतर हमले के कारण मथुरा के यादव वहां से भाग गए। वे दूर दक्षिण तक गोमांत तक पहुंचे थे। हरिवंश पुराण के अनुसार जरासंध वृहद्रथ-वंश का सबसे प्रतापी राजा था। वो जन्म के समय दो टुकड़ों में विभक्त था। जरा नामक राक्षसी ने उसे जोड़ा था तभी उसका नाम जरासंध पड़ा। 


भविष्य पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने देवी गोमती की कृपा से ही जरासंध पर विजय प्राप्त की थी। राजा भोज ने अपने काल में गोमती शक्ति पीठ के मंदिर का निर्माण करवाया था। देवी गोमती के विशेष पूजन व उपाय से शत्रुओं से मुक्ति मिलती है, पूरी दुनिया आपके वशीभूत होती है व दुर्भाग्य से छुटकारा मिलता है।
 

पूजन विधि: घर के ईशान कोण में हरे कपड़े पर मूंग भरा कांसे का कलश स्थापित करें, कलश पर 7 अशोक के पत्ते और नारियल रखकर विधिवत पूजन करें। कांसे के दिये में गौघृत का दीप करें, सुगंधित धूप करें, गोलोचन से तिलक करें, फूल चढ़ाएं व साबूदाने की खीर का भोग लगाएं। किसी माला से 108 बार इस विशेष मंत्र का जाप करें। पूजन के बाद भोग प्रसाद स्वरूप वितरित करें। 


पूजन मुहूर्त: शाम 17:00 से शाम 18:00 तक।

पूजन मंत्र: ॐ गोमती देव्यै: नमः॥

शुभ व अशुभ मुहूर्त
गुलिक काल - सुबह 10:30 से दिन 12:00 तक। 

अभिजीत मुहूर्त: बुधवार के कारण नहीं है।

राहु काल - दिन 12:00 से दिन 01:30 तक। 

यमगंड काल - सुबह 07:30 से सुबह 09:00 तक।

अमृत वेला - शाम 04:30 से शाम 06:00 तक।

काल वेला - सुबह 09:00 से सुबह 10:30 तक।


यात्रा मुहूर्त: आज दिशाशूल उत्तर व राहुकाल वास दक्षिण-पश्चिम में है। अतः उत्तर व दक्षिण-पश्चिम दिशा की यात्रा टालें।


आज का गुडलक ज्ञान
आज का गुडलक कलर:
 हरा।

आज का गुडलक दिशा: पूर्व।

आज का गुडलक मंत्र: ग्लों सर्वलोक वश्यकरी स्वाहा॥ 

आज का गुडलक टाइम: रात 20:45 से रात 21:45 तक।

आज का बर्थडे गुडलक: सर्व वशीकरण के लिए महादेवी पर चढ़े गोमती चक्र को पर्स में रखें।

आज का एनिवर्सरी गुडलक: दुर्भाग्य से छुटकारा पाने के लिए महादेवी पर चढ़ी 12 पीली कौड़ी जलप्रवाह करें।

गुडलक महागुरु का महा टोटका: शत्रुओं से मुक्ति पाने के लिए पान के पत्ते पर चूने से शत्रु का नाम लिखकर महादेवी पर चढ़ाएं।