विदेश मंत्री सुषमा स्वराज चीन और मंगोलिया की छह दिनों की यात्रा पर है। संघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंची सुषमा भारत और चीन मैत्री को आगे बढ़ाने में हिंदी भाषा के योगदान पर चीन के विद्यार्थियों से बात चीत रही हैं।  बीजिंग में चल रहे इस कार्यक्रम में सुषमा ने कहा कि किसी भी देश की संस्कृति और सभ्यता को जानने के लिए दोनों देशों एक दूसरे की भाषा का जानना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा चीन में काफी पॉपुलर हो रही है।

उन्होंने कहा कि मैं कल विदेश मंत्री वांग यी से बातचीत की उन्होंने बताया कि चीन में दंगल, सेक्रेट सुपरस्टार और हिंदी मीडियम बहुत पॉपुलर है। उन्होंने आगे कहा कि जब तक चीन के विद्यार्थी हिंदी को प्यार नहीं करेंगे तब तक दोनों देशों के विदेशमंत्री अपने रिश्तों को मजबूत नहीं कर सकेंगे। उन्होंने एकबार फिर दोहराया कि यह बहुत महत्वपू्र्ण है कि दोनों देश एक दूसरे की भाषा को सिर्फ जाने ही नहीं बल्कि समझें भी।


इस मुलाकात के दौरान चीन की एक छात्रा ने कहा कि उसका सपना है कि वह भारत जाए लेकिन पता नहीं कि यह सपना कब पूरा होगा। सुषमा ने उस छात्र के सपने को पूरा करने का फैसला ले लिया है उन्होंने कहा कि मैं उस 25 बच्चों को जो हिंदी सीख रहे हैं उन्हें भारत लाने का न्यौता दे दिया है।

चीन में भी हिंदी अध्ययन की जड़ें अब और गहरी हो रही हैं।चीन में इस समय नौ से अधिक विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है, इनमें शंघाई अंतरराष्ट्रीय भाषा विश्वविद्यालय शंघाई, पीकिंग (बीजिंग) विश्वविद्यालय, विदेशी भाषा अध्ययन विश्वविद्यालय पीकिंग (बीजिंग), जनसंचार विश्वविद्यालय बीजिंग, शीआन अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, युन्नान अल्पजाति विश्वविद्यालय, क्वांग्तुंग विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, लुओयांग विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, सेंनचेन विश्वविद्यालय आदि प्रमुख हैं।


इनमें स्नातक स्तर पर हिंदी मुख्य पाठ्यक्रम के रूप में पढाई जा रही है, इसके अलावा कुछ विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर एवं पीएचडी स्तर पर भी हिंदी में अध्ययन हो रहा है। हिंदी में शिक्षा प्रसार बढ़ने से भारतीय साहित्य और भाषाओं के प्रति विद्यार्थियों और शोधार्थियों की रूचि बढी है। इससे भारत और चीन के नागरिकों के बीच भाषिक लेनदेन तो बढ़ ही रहा है प्रतिवर्ष सैकड़ों नए विद्यार्थियों का हिंदी से जुड़ाव भी हो रहा है। इससे पड़ोसी धर्म की समझ और गहरी होने के साथ-साथ आम लोगों में भी भारत को जानने की रूचि पैदा हुई है।