जम्मू । कश्मीर के ठंडे क्षेत्रों में ही नहीं, गर्म रहने वाले जम्मू के मैदानी इलाकों में भी सेब की पैदावार हो सकेगी। यहां पर किए गए ट्रायल के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। भलवाल ब्लॉक के गांव रांजन में ढाई साल पहले हरिमन-99 सेब की वेराइटी के 25 पौधे लगाए गए थे। अब इनमें फल आ गए हैं और साइज भी बेहतर है।


बागवान सुरेंद्र सिंह और वीरेंद्र सिंह के फार्म में पिछले साल भी कुछ पौधों पर अच्छे सेब लगे थे। इस सफलता के बाद उन्होंने जम्मू के मैदानी क्षेत्रों के बागवानों को सेब के इन पौधों को लगाने के लिए प्रेरित करने का मन बनाया है। इसके लिए 10 हजार पौधे तैयार किए जा रहे हैं। दिसंबर में सीजन आने पर ये पौधे बागवानों को दिए जाएंगे। बीते सीजन में भी कुछ पौधे बागवान व किसानों को दिए गए थे। यह पहला मौका होगा जब जम्मू के मैदानी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सेब के पौधे लग सकेंगे।

सुरेंद्र सिंह व वीरेंद्र सिंह का बागवानी तकनीक जानने के लिए 2016 में हिमाचल प्रदेश जाना हुआ। तभी सेब की इस वेराइटी के बारे में पता चला। उन्होंने मैदानी इलाके में सेब के बाग देखे। सेब खाया तो स्वाद में अच्छा पाया। तभी मन में खयाल आया कि यह सेब जम्मू के मैदानी व गर्म इलाकों में भी तैयार हो सकता है। कुछ पौधे मंगवा कर रांजन गांव में ट्रायल हुआ। अब अधिक से अधिक ग्रामीण सेब के बाग लगाएं, इसके लिए सुरेंद्र व वीरेंद्र ने पूरी तकनीक सीखी और हजारों पौधे तैयार किए जा रहे हैं। इनका कहना है कि जम्मू के कंडी क्षेत्र के युवा सेब के बाग लगाकर अच्छा रोजगार पा सकते हैं।


वेराइटी हरिमन 99


हरिमन हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर के किसान का नाम है, जिसने बागवानी व खेती में कई तजुर्बे हासिल किए हैं। कुछ साल पहले सेब की ऐसी वेराइटी तैयार कर डाली, जिसको तैयार करने के लिए ठंडे वातावरण की जरूरत नहीं है। इसी वेराइटी का नाम हरिमन 99 दिया गया है। यह वेराइटी 48 डिग्री सेल्सियस के तापमान में भी फल सकती है। दो साल में पौधा फल देने लगता है। सात साल बाद एक पेड़ से हर साल एक क्विंटल तक पैदावार प्राप्त की जा सकती है। दिसंबर से 15 फरवरी तक इस सेब के पौधे लगाने का समय है। फरवरी में फूल लगने लगते है और जून में फल तैयार हो जाते हैं। दूसरे राज्यों में भी किसानों का रुझान इस सेब की खेती कीे ओर बढ़ रहा है।


कृषि विशेषज्ञ अमरीक सिंह का कहना है कि इससे जम्मू संभाग के किसानों को लाभ मिलने वाला है। खेती के साथ साथ बागवानी का रास्ता भी खुल आएगा।