पेरिस। जेरोम हैमन को अब नई पहचान मिल गई है-"तीन चेहरों वाला शख्स"। दरअसल, जेरोम दुनिया के पहले ऐसे शख्स हैं जिनके चेहरे का दो बार प्रत्यारोपण किया गया है। कुछ महीनों पहले ही उनका दूसरी बार पूरे चेहरे का प्रत्यारोपण हुआ। इसके तीन महीने बाद तक वह पेरिस के अस्पताल में रह रहे हैं। लेकिन अब उन्होंने अपनी नई पहचान स्वीकार कर ली है। उनके चेहरे में त्वचा व अन्य हिस्सों को एकरूप करना बाकी है।


हालांकि इस प्रक्रिया में काफी समय लगेगा। यह उपलब्धि पेरिस के जॉर्जेस-पॉम्पेडो योरपीय अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने हासिल की है। प्लास्टिक सर्जरी प्रोफेसर लॉरेन्ट लैंटीरी ने इस टीम का नेतृत्व किया। लॉरेन्ट ने ही 2010 में हैमन के पूरे चेहरे का प्रत्यारोपण किया था।


मामूली सर्दी के उपचार से बिगड़ गया था प्रत्यारोपण


जैरोम "न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 1" से ग्रसित हैं जिसकी वजह से ट्यूमर होता है। जेरोम का पहला प्रत्यारोपण 2010 में हुआ था और वह सफल भी रहा था। उसी साल जेरोम को साधारण-सी सर्दी के लिए एक एंटीबायोटिक दी थी। जिसके बाद 2016 में उनका चेहरा बिगड़ने लगा।


बिना चेहरे के रहना पड़ा लेकिन उम्मीद नहीं छोड़ी


प्रोफेसर लॉरेन्ट बताते हैं कि जेरोम करीब दो महीने तक किसी चलते-फिरते मुर्दे की तरह हो गए थे। न पलकें थीं, न ही कान और न त्वचा। वह बोलना तो दूर कुछ खाने में भी असमर्थ थे। इसके बावजूद उन्होंने नया डोनर मिलने की उम्मीद नहीं छोड़ी थी। जनवरी में जेरोम का ऑपरेशन किया गया। दूसरे प्रत्यारोपण के लिए जेरोम का तीन महीने तक उपचार भी किया गया था ताकि उनका शरीर नया चेहरा स्वीकार कर सके।


2005 में हुआ था पहला प्रत्यारोपण


ब्रिटेन की एक वेबसाइट के मुताबिक, 2005 में उत्तरी फ्रांस में पहली बार चेहरे का प्रत्यारोपण किया गया है। तब से अब तक दुनियाभर में 40 बार ऐसे प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं।


मैंने अपना पहला ट्रांसप्लांट तुरंत स्वीकार लिया। मुझे लगा यह मेरा नया चेहरा है। दूसरे ट्रांसप्लांट के बाद भी मेरी यह सोच रही। अगर मैं इसे स्वीकार नहीं करता तो स्थिति बहुत बिगड़ जाती। लेकिन अब यह मैं ही हूं।-जेरोम हैमन