वाशिंगटन : पृथ्वी से विशालकाय जानवरों और विलुप्ति की कगार पर पहुंचे जंतुओं का लुप्त होना भविष्य में भी जारी रहा तो 200 साल बाद सबसे बड़ा स्तनधारी गाय होगी। इसका मतलब है कि आने वाले सालों में धीरे-धीरे हाथी, जिराफ और दरियाई घोड़े जैसे जीव धरती से खत्म हो जाएंगे। अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू मेक्सिको के शोधकर्ताओं के अनुसार इसका सबसे बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन नहीं बल्कि मनुष्य हैं।


शोधकर्ताओं का कहना है कि जानवरों का लुप्त होना कोई आकस्मिक घटना नहीं है। यह प्रक्रिया करीब एक लाख 25 हजार वर्षो से चली आ रही है। जब अफ्रीका के मूल निवासी प्राचीन मनुष्यों जैसे निएंडरथल ने अन्य महाद्वीपों में फैलना शुरू किया था तब से ही बड़े आकार वाले स्तनधारियों के विलुप्त होने की घटना में तेजी आई। पूर्व में भी मानवीय क्रियाकलापों के कारण बड़े जानवर विलुप्त हुए थे और वर्तमान में भी ऐसा ही हो रहा है।


शोधकर्ता फेलिसा स्मिथ ने कहा, 'एक लाख 25 हजार साल पहले अफ्रीका के स्तनधारी जीवों का औसत आकार अन्य महाद्वीप के जीवों से 50 फीसद कम था। हमें आशंका है कि प्लेस्टोसीन काल के अंत से ही प्राचीन मानवों ने स्तनधारियों की विविधता और उनके आकार को प्रभावित करना शुरू कर दिया था।' प्लेस्टोसीन 26 लाख साल पहले से 11 हजार 760 वर्ष पहले तक का काल था। समय के साथ जैसे-जैसे मानवों ने पूरे विश्व में फैलना शुरू किया ऊनी गैंडे, मैमथ, ऊंट, जमीन पर रहने वाले विशालकाय स्लॉथ, छोटे मुंह वाले भालू और जंगली बिल्लियों की कई प्रजाति विलुप्त हो गईं।


जलवायु परिवर्तन का नहीं पड़ता अधिक असर


इस शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि 6.5 करोड़ साल पहले जानवरों की विलुप्ति जलवायु परिवर्तन के कारण नहीं हुई थी। उस वक्त इस कारण या तो जानवर विस्थापित हुए या उन्होंने खुद को वातावरण के अनुकूल ढाल लिया। हालांकि, वर्तमान में जलवायु परिवर्तन प्राणियों की विलुप्ति का महत्वपूर्ण कारण हो सकता है।