एससी-एसटी एक्ट को लेकर मध्य प्रदेश सरकार और पुलिस मुख्यालय आमने-सामने आ गए हैं. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के एसपी को निर्देश जारी कर गाइडलाइन का पालन करने के निर्देश दिए थे. लेकिन दूसरी तरफ सरकार जारी किए गए आदेश को वापस लेने की बात कह रही है. जबकि मुख्यालय ने आदेश को वापस लेने की बात को सिरे से मना किया है.


सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार और पुलिस मुख्यालय खुलकर आमने-सामने आ गया है. एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर हाल ही में पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश के सभी एसपी को निर्देश जारी कर कोर्ट की गाइडलाइन का पालन करने के निर्देश दिए थे. कोर्ट के निर्देश के अनुसार एससी-एसटी से जुड़े मामलों में जांच के बाद एफआईआर और आरोपी की गिरफ्तारी होगी. इस फैसले के बाद मध्यप्रदेश में हिंसा भी हुई. पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ ने आदेश भी वापस लिया लेकिन मध्यप्रदेश में आदेश वापस लेने को लेकर सरकार और पुलिस मुख्यालय में असमंजस की स्थिति बरकरार है.


गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने हाल ही में मीडिया के सवाल पर कहा था कि पुलिस मुख्यालय ने जो आदेश जारी किया गया है, उसे राज्य शासन ने वापस ले लिया है. विशेषज्ञों की माने, तो यदि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जारी किए गए आदेश को सरकार वापस लेती है, तो उसे कोर्ट की अवमानना मना जाएगा.

वहीं, पुलिस मुख्यालय के आईजी मकरंद देउस्कर ने एससी एसटी-एक्ट पर आए फैसले को लेकर कहा है कि उच्चतम न्यायलय का जो फैसला हुआ था, उसके संबंध में सभी एसपी को निर्देशित करने के लिए सर्कुलर जारी किया गया. उन्होंने कहा कि आदेश वापस लेने को लेकर कोई जानकारी नहीं है. जबकि गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह कह रहे हैं कि पुलिस मुख्यालय ने जो आदेश जारी किया है, उसे वापस लिया गया है.


पुलिस मुख्यालय ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आई गाइडलाइन का पालन करने के लिए सभी एसपी को निर्देशित किया था. लेकिन सरकार के आदेश वापस लेने की बात ने इस पूरे मामले को उलझाकर रख दिया है.