गुरुवार दिनांक 19.04.18 को वैसाख शुक्ल चतुर्थी के उपलक्ष्य में विनायक चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। शास्त्रनुसार गणपति चतुर्थी तिथि के स्वामी हैं। भविष्य पुराण, चतुर्वर्ग चिंतामणि व कृत्यकल्पतरु शास्त्रों ने विनायक चतुर्थी को गणपति चतुर्थी कहकर संबोधित किया है। विनायक चतुर्थी पर्व हर माह में वार के अनुसार मनाया जाता है। गुरुवार को पड़ने वाली शुक्ल चतुर्थी को गुरुवारीय विनायक चतुर्थी कहते हैं। गुरुवारीय विनायक चतुर्थी पर गणपति के हरिद्रा स्वरूप के पूजन का विधान है।
 

पौराणिक मतानुसार मां त्रिपुरसुन्दरी के द्वारा स्मरण किये जाने पर हरिद्रा गणपति ने प्रकट होकर भण्डासुर दैत्य के द्वारा किये गये अभिचार यंत्र को नष्ट कर दिया था। 
हरिद्रा हल्दी को कहा जाता है। तंत्रशास्त्र के अनुसार हरिद्रा गणेश मां बगलामुखी के अंग देवता है। विवाह आदि मंगल कार्यो में हल्दी के लेप का प्रयोग किया जाता है। हल्दी को अति शुभ, सौभाग्यदायक व विघ्न विनाशक माना जाता है। हल्दी अनेकों बीमारियों में भी अचूक अस्त्र की भांति कार्य करती है। इसीलिए हरिद्रा गणपति को अत्यन्त शुभ माना जाता है। हरिद्रा गणपति का स्वरूप बड़ा निराला है। इन्होंने पीले रेशमी वस्त्र धरण किए हुए हैं, गणपति का वर्ण भी पीला है। स्वर्ण मुकुट से सुसज्जित चतुर्भुजी गणपति के ऊपरी दाएं हाथ में अंकुश, निचले दाएं हाथ में वरद मुद्रा, ऊपरी बाएं हाथ में पाश व निचले बाएं हाथ में एक रत्नकुंभ धारण किए हुए हैं। गुरुवारीय विनायक चतुर्थी पर हरिद्रा गणपति के विशेष पूजन व उपाय से शत्रु भी मित्र बनते हैं। मनवांछित व्यक्ति से लव मैरेज में सक्सेस मिलती है। बेरोजगारों को नौकरी मिलती है।


विशेष पूजन विधि: घर के ईशान कोण में पीला कपड़ा बिछाकर हरिद्रा गणपति का चित्र स्थापित कर विधिवत पूजन करें। चावल के आटे में हल्दी मिलाकर चौमुखी दिया बनाकर घी का दीप जलाएं, चंदन से धूप करें, पीले फूल चढ़ाएं, हल्दी से तिलक करें, बेसन के लड्डू का भोग लगाएं तथा रुद्राक्ष की माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद बेसन के लड्डू पीली आभा लिए गाय को खिला दें।

पूजन मुहूर्त: प्रातः 09:50 से प्रातः 10:50 तक। 
पूजन मंत्र: हुं गं ग्लौं हरिद्रा गणपतये वर वरद सर्व जन हृदयं स्तम्भय-स्तम्भय स्वाहा।॥


शुभ मुहूर्त
गुलिक काल - सुबह 09:00 से सुबह 10:30 तक।


अभिजीत मुहूर्त: दिन 11:36 से दिन 12:24 तक।


यमगंड काल - सुबह 06:00 से सुबह 07:30 तक।


राहु काल - दिन 01:30 से दिन 3:00 तक। 


अमृत वेला - दिन 01:30 से दिन 03:00 तक। 


काल वेला - शाम 03:00 से शाम 04:30 तक।


आज का गुडलक ज्ञान
आज का गुडलक कलर: पीत।


आज का गुडलक दिशा: ईशान।


आज का गुडलक मंत्र: गं गणपतये महाबलाय नमः॥


आज का गुडलक टाइम: शाम 16:15 से शाम 17:15 तक।


आज का बर्थडे गुडलक: नौकरी मिलने में सफलता के लिए मौली में पिरोए 11 नींबू की माला गणपति पर चढ़ाएं। 


आज का एनिवर्सरी गुडलक: शत्रुओं को मित्र बनाने के लिए रोटी पर शहद से शत्रु का नाम लिखकर गणपति को भोग लगाएं।


गुडलक महागुरु का महा टोटका: लव मेरेज में सक्सेस के लिए भोजपत्र पर हल्दी से इच्छित व्यक्ति का नाम लिखकर गणपति पर चढ़ाएं।