देश में एक बार फिर नोटबंदी जैसा माहौल पैदा होने लगा है. एक बार फिर एटीएम और बैंकों में नकदी निकालने के लिए लाइन लगने लगी हैं. सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, गुजरात समेत कई राज्यों में बैंकों और एटीएम में कैश नहीं है.

सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने इसकी कई वजहें गिनाई हैं. इसके साथ ही सरकार ने कहा है कि जल्द ही हालात सामान्य हो जाएंगे. एटीएम से कैश गायब होने के लिए लोगों के नकदी सहेजने समेत अन्य कई कारण गिनाए जा रहे हैं. आगे जानिए इनके बारे में.

त्योहारी सीजन: सरकारी सूत्रों का कहना है कि कई राज्यों में बैसाखी, बिहू और सौर नव वर्ष जैसे त्योहार होने की वजह से लोगों को ज्यादा नकदी की जरूरत थी. इस वजह से संभव है कि लोगों ने ज्यादा नकदी अपने बैंक खातों से निकाली हो.

हालांकि अफरा-तफरी न मचे इसके लिए वित्त मंत्रालय ने तत्काल रिजर्व बैंक के अधिकारियों के साथ बैठक की. सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने विभिन्न राज्यों के अधिकारियों और बैंक प्रमुखों से परामर्श भी किया. 

जरूरत से ज्यादा निकल रही नकदी: रिजर्व बैंक के सूत्रों का कहना है कि असम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में लोगों के जरूरत से ज्यादा नकदी निकालने की वजह से यह संकट खड़ा हुआ है.

कम आपूर्ति: आरबीआई के सूत्रों का कहना है कि नकदी की उपलब्धता में ऐसे उतार-चढ़ाव होते रहते हैं. जैसे यदि किसी राज्य में डिमांड बढ़ जाती है तो दूसरे राज्य में आपूर्ति पर थोड़ा अंकुश लगा दिया जाता है. उदाहरण के लिए असम में शनिवार को बिहू त्योहार होने की वजह से उसके कुछ दिनों पहले नकदी की निकासी काफी बढ़ गई. इसलिए दूसरे कुछ राज्यों में आपूर्ति में कटौती करनी पड़ी.

नये नोट संभाल कर रखने का चलन: नोटबंदी के दौरान 2000 और 500 रुपये के नये नोट के बाद 200 और 50 रुपये के नये नोट जारी किए गए हैं. ये नोट मिलने शुरू तो हो गए हैं, लेकिन बड़ी संख्या में नहीं. दरअसल जब भी नये नोट आते हैं, तो लोग उन्हें खर्च  करने की बजाय संभाने पर ज्यादा ध्यान देते हैं. 200 और 50 रुपये के नये नोटों के साथ भी यही हो रहा है.

चुनाव:  इसके अलावा कर्नाटक में चुनाव करीब हैं, इसलिए वहां भी नकदी की मांग काफी बढ़ गई है. फसल के समय किसानों द्वारा भी नकदी की निकासी बढ़ जाती है.