भोपाल। रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने समझाइश दी है कि रेलवे में निर्णय न लेने की परंपरा को टाला जाए। लंबित मामले भी नासूर बन रहे हैं, इनसे रेलवे की गति अवरुद्ध हो रही है। 90 फीसदी मामले 6 माह में खत्म किए जा सकते हैं। छोटे कर्मचारी दबाव में हैं उन्हें एसीआर खराब होने का डर रहता है इसलिए सही रिपोर्ट नहीं आती।


रेल राज्यमंत्री सिन्हा ने यहां कार्यक्रम में अनेक मुद्दों पर बेबाकी से अपने मन की बातें रखीं। कवि गोपालदास नीरज की एक दार्शनिक कविता भी पढ़ी। वह बोले कि आईटी के क्षेत्र में दुनिया के दूसरे देश हमारी प्रतिभाओं के बूते सशक्त हो रहे हैं। लेकिन भारतीय रेल पीछे है, हमें जल्दी ही सुधार करना चाहिए। यह राष्ट्र की बड़ी सेवा होगी। कार्रवाई के डर से छोटे कर्मचारी अपनी कमियां छिपा लेते हैं। लेकिन बीमारी का डाग्नोसिस नहीं होगा तो इलाज कैसे करेंगे? हम अपनी कमजोरियों को नहीं जानेंगे तो सुधार कैसे होगा। ट्रेक टाइम और रनिंग टाइम की जानकारी प्राप्त हो सके इसके लिए तकनीकी सुविधा बढ़ाना जरूरी है।


अगले साल हम रहेंगे कोई नहीं जानता: सिन्हा


राज्यमंत्री सिन्हा ने दार्शनिक अंदाज में यहां तक कह दिया कि कार्यक्रम में अगले साल हम रहेंगे कोई नहीं जानता लेकिन आप लोग 35-36 साल स्थायी तौर पर रहेंगे। रेलवे की विश्वसनीयता हमारी बदौलत नहीं इसके लिए अनेक लोगों खून-पसीना बहाया है। फौजियों की तरह जुटे हैं रेलकर्मी। हमने कई उतार-चढ़ाव देखे, पूर्वजों ने जो नींव डाली उसे हम सामूहिक जिम्मेदारी से आगे बढ़ाना है।


ओवरऑल परफार्मेंस देखें


रेलमंत्री पीयूष गोयल ने यह भी पूछ लिया कि पुरस्कारों में कोटा तो नहीं है? फिर बताने लगे कि क्षमता और काबिलियत पर सभी पुरस्कार दिए गए। उन्होंने कहा कि यहां रेलवे के सभी वरिष्ठ अफसर मौजूद हैं। इसलिए सभी इस बात पर विचार करें कि हम ओवरऑल परफार्मेंस पर ध्यान दें। स्वयं को अलग-अलग खांचों में देखने के बजाए समग्र रूप से देखें।


विश्व की सबसे बड़ी संस्था: लोहानी


रेलवे बोर्ड के चेयरमेन अश्विनी लोहानी ने बताया कि 16 अप्रैल 1853 को शुरू हुई भारतीय रेलवे की आज 165वीं वर्षगांठ है। रेलवे देश की सबसे बड़ी संस्था है, हिंदुस्तान डायनेमिक डिलेवरी का सिंबल है। देश में 22 हजार ट्रेनें 8 हजार स्टेशनों से रोज दौड़ती हंै। रेलवे में 13 लाख कर्मचारी हैं, रोज तीन मिलियन टन माल इधर से उधर भेजते हैं।