अपनी विशेषताओं के लिए देशभर में मशहूर कड़कनाथ मुर्गे ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा स्थित एक परिवार की जिंदगी पूरी तरह से बदल दी है। कड़कनाथ मुर्गे की दुर्लभ प्रजातियों को बेचकर एक परिवार ने मोटा मुनाफा कमाया है।

महिला के मुताबिक, पिछले साल मई में उन्होंने इन मुर्गों को बेचने का काम शुरू किया था। मुर्गा फॉर्म खोलने में कृषि विज्ञान केंद्र ने भी उनकी मदद की। और बीते 8 महीनों में 300 कड़कनाथ मुर्गे बेचकर 3 लाख रुपए की मोटी कमाई की।

यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं दंतेवाड़ा में कई ऐसे परिवार हैं जहां इस मुर्गे की असली ताकत की पहचान देखने को मिली है। राज्य सरकार के जिला स्तरीय शुरुआत के तहत दंतेवाड़ा की महिलाओं को मामूली कीमत में कड़कनाथ के चूजे दिए गए हैं जिनके जरिए महिलाएं मोटा मुनाफा कमा रही है। यह कई परिवारों की आजीविका के लिए एक महत्वपूर्ण जरिया बन गया है।

बता दें कि इससे पहले यह कड़कनाथ मुर्गे जीआई टैग (भौगोलिक संकेतक) को लेकर चर्चा में आए थे जब छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश ने इसपर अपना-अपना दावा किया था। जिसके बाद चेन्नई के भौगोलिक संकेतक पंजीयन कार्यालय ने मुर्गे का जीआई टैग मध्यप्रेदश को दे दिया था। 

दोनों पड़ोसी राज्यों ने काले पंख वाले मुर्गे की प्रजाति के लिए ‘जीआई टैग’ प्राप्त करने के लिए चेन्नई स्थित भौगोलिक संकेतक पंजीयन कार्यालय में आवेदन दिए थे।

मध्यप्रदेश का दावा था कि कड़कनाथ मुर्गे की उत्पत्ति प्रदेश के झाबुआ जिले में हुई है, जबकि छत्तीसगढ़ का कहना था कि कड़कनाथ को प्रदेश के दंतेवाडा जिले में अनोखे तरीके से पाला जाता है और यहां उसका सरंक्षण और प्राकृतिक प्रजनन होता है। 

ये है इस मुर्गे की खासियतें

विशेषज्ञों के अनुसार कड़कनाथ नाम के मुर्गे में आयरन और प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, जबकि कॉलेस्ट्रॉल की मात्रा अन्य प्रजाति के मुर्गों से काफी कम पाई जाती है। इसके अलावा यह अन्य प्रजातियों के मुर्गों से बहुत अधिक दाम में बेचा जाता है। इसके खून का रंग काला होता है।