मंगलवार दिनांक 17.04.18 को वैसाख शुक्ल द्वितीया पर चंद्र दर्शन पर्व मनाया जाएगा। चंद्रमा का एक नाम सोम भी है। शास्त्रों में चंद्रमा को सुधाकर व सुधांशु भी कहा है, जिसका संबंध जल तत्त्व से है। सुधा का अर्थ अमृत, मधुर तरल अर्थात जल से है। पृथ्वी पर अगर अमृत है तो वह जल ही है। सोम का दूसरा नाम भी अमृत और जल है। रात्रि को प्रकाशित होने की वजह से चंद्रमा को निशापति भी कहते हैं। पौराणिक मतानुसार ऋषि अत्रि व अनुसूया के पुत्र चंद्रमा का विवाह दक्ष प्रजापति की सत्ताईस पुत्रियों से हुआ था, इन्हीं चंद्र पत्नियों के नाम पर सत्ताईस नक्षत्रों के नाम पड़े हैं। चंद्र सर्वमय व सोलह कलाओं से युक्त हैं। 


ये कलाएं चंद्रमा की 16 तिथियां है। द्वितीया तिथि चंद्रमा की दूसरी कला है। इस कला का अमृत कृष्णपक्ष में स्वयं सूर्य पी कर स्वयं को ऊर्जावान रखते हैं व शुक्ल पक्ष में पुनः चंद्रमा को लौटा देते हैं। शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भगवान शंकर देवी गौरी के समीप होते हैं, अतः शिव पूजन, रुद्राभिषेक, पार्थिव पूजन व विशेष रूप से चंद्र दर्शन व पूजन अति शुभ रहता है। 


हर माह अमावस्या के बाद जब पहली बार चंद्रमा आकाश पर दिखता है, उसे चंद्र दर्शन कहते हैं। शास्त्रनुसार इस समय चंद्र दर्शन करना अत्यंत फलदायक होता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार मन व ज्ञान के स्वामी चंद्र अनादि व अजय हैं, इनका वर्ण गौर है। इनके वस्त्र, दस घोड़ों वाला रथ श्वेत हैं। इनके एक हाथ में गदा व दूसरे में वरमुद्रा है। कुंडली में अशुभ चंद्रमा होने से मानसिक विकार, माता को कष्ट, धन हानि की सम्भावना रहती है। अतः दूज पर चंद्र दर्शन और विधिवत चंद्र देव के पूजन से मनोविकारों से मुक्ति मिलती है, आयाधिक क्रोध से छुटकारा मिलता है तथा सौभाग्य की प्राप्ति होती है। 

पूजन विधि: संध्या के समय चंद्र देव का 16 चीजों से पूजन करें। गौघृत का दीपक करें, कर्पूर जलाकर धूप करें, सफ़ेद फूल, चंदन, चावल, व इत्र चढ़ाएं, खीर का भोग लगाएं व पंचामृत से चंद्रमा को अर्घ्य दें तथा सफ़ेद चंदन की माला से 108 बार इस विशिष्ट मंत्र को जपें। पूजन के बाद भोग किसी स्त्री को भेंट करें।


चंद्र पूजन मुहूर्त: शाम 18:45 से शाम 19:45 तक।

चंद्र दर्शन मुहूर्त: शाम 19:00 से शाम 20:00 तक।

पूजन मंत्र: ॐ शीतांशु विभांशु अमृतांशु नम:॥


शुभ मुहूर्त: 
गुलिक काल - दिन 13:30 से दिन 15:00 तक।

राहु काल - शाम 15:00 से शाम 16:30 तक। 

अभिजीत मुहूर्त - दिन 11:36 से दिन 12:24 तक।

यमगंड काल - सुबह 09:00 से सुबह 10:30 तक।

काल वेला - दिन 13:30 से दिन 15:00 तक।

अमृत वेला - दिन 12:00 से दिन 13:30 तक।

यात्रा मुहूर्त: आज दिशाशूल उत्तर व राहुकाल वास पश्चिम में है। अतः उत्तर व पश्चिम दिशा की यात्रा टालें।

आज का गुडलक ज्ञान
आज का गुडलक कलर: लाल।

आज का गुडलक दिशा: दक्षिण।

आज का गुडलक मंत्र: ॐ सौम्यजनकाय नमः ॥

आज का गुडलक टाइम: दिन 11:25 से दिन 12:25 तक।

आज का बर्थडे गुडलक: क्रोध से छुटकारा पाने के लिए चंद्रदेव को दूध-शहद से अर्घ्य दें।

आज का एनिवर्सरी गुडलक: मेंटल टेंशन से मुक्ति के लिए पानी में छाया देखकर चंद्र देव पर चढ़ाएं।


महागुरु का महा टोटका: सौभाग्य की प्राप्ति के लिए चंद्र देव पर चढ़ा चांदी का सिक्का तिजोरी में स्थापित करें।