मध्य प्रदेश सरकार खुद को हमेशा मजदूरों का हितैषी बताती रही है लेकिन हकीकत कुछ अलग ही बयान कर रही हैं. मध्यप्रदेश में मनरेगा के पांच लाख से ज्यादा मजदूरों को डेढ़ माह से भुगतान नहीं किया गया है. ये बकाया राशि सौ करोड़ से ज्यादा पहुंच गई है. बताया जा रहा है कि पंचायत एवं ग्रामीण मंत्री गोपाल भार्गव ने केंद्र से राशि आने का हवाला देकर हाथ खड़े कर लिए हैं

दरअसल, विभाग काम करने वाले मजदूरों का पंजीयन और उनकी संख्या केंद्र सरकार के पोर्टल पर अपलोड करने का काम रता है. मजदूरी का भुगतान केंद्र सरकार सीधे मजदूरों के खातों में करती है.

रोजगार गारंटी कानून में मजदूरी भुगतान में 15 दिन से अधिक बिलंब पर जवाबदेही तय किए जाने का नियम भी है. इसके तहत प्रभावित श्रमिकों को मुआवजे का भी प्रावधान है, लेकिन अकसर भुगतान में देरी को तकनीकी कमी बताकर केंद्र और राज्य सरकार पल्ला झाड़ लेती है. मजदूरी का भुगतान नहीं होने की वजह से मजदूर को परेशान होना पड़ता है. इस मसले को लेकर बीजेपी केंद्र की जिम्मेदारी बताकर जल्द भुगतान करने का दावा कर रही है. वहीं कांग्रेस ने इस मामले पर बीजेपी को आड़े हाथों लिया है.