पटना । बिहार विधान परिषद के चुनाव में 11 उम्मीदवार मैदान में हैं। सोमवार को नामांकन का आखिरी दिन है। अभी तक की स्थिति के मुताबिक चुनाव की नौबत नहीं आएगी। इस प्रकार सभी उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत लगभग तय है। जदयू, भाजपा और कांग्रेस ने रविवार को अपने-अपने कोटे के उम्मीदवारों के नाम का एलान कर दिया। ये सभी उम्मीदवार सोमवार को नामांकन करेंगे। नामांकन पत्रों की जांच के बाद उम्मीदवारों की जीत की घोषणा संभव है। 

जदयू ने अपने कोटे की तीन सीटों के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, रामेश्वर महतो, खालिद अनवर को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने अपनी एकमात्र सीट के लिए प्रेमचंद मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है। राजद के चार प्रत्याशियों ने पहले ही पर्चे भर दिए हैं। इनमें राबड़ी देवी, रामचंद्र पूर्वे, सैयद खुर्शीद मोहसीन एवं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के पुत्र संतोष मांझी शामिल हैं। 

सभी दलों का सामाजिक समीकरण का प्रयास 

 

विधान परिषद चुनाव में कमोवेश सभी दलों ने सामाजिक समीकरण को साधने का प्रयास किया है। जदयू में वर्तमान एमएलसी संजय सिंह, चंदेश्वर चंद्रवंशी, उपेंद्र कुशवाहा व राजकिशोर कुशवाहा के नाम टिकट दावेदारों में शुमार था, लेकिन पार्टी ने इनके दावों पर विराम लगाते हुए दो नए चेहरे को टिकट दिया है। 

इसमें सीतामढ़ी के रामेश्वर महतो कुशवाहा समाज से आते हैं, जबकि खालिद अनवर अल्पसंख्यक वर्ग से होने के साथ ही एक उर्दू अखबार के मालिक भी है। इधर, भाजपा ने बिहार में एससी/एसटी एक्ट को लेकर जारी घमासान के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान को प्रत्याशी बनाया है। 11 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में संजय पासवान इकलौते दलित उम्मीदवार हैं।