श्रीनगर जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने बीजेपी के उन मंत्रियों का इस्तीफा मंजूर कर लिया है जिन्होंने कठुआ गैंगरेप और मर्डर केस में आरोपियों की कथित तौर पर हिमायत की थी. जम्मू-कश्मीर की पीडीपी सरकार में शामिल बीजेपी के दो मंत्रियों ने शुक्रवार को अपना इस्तीफा दिया था. बता दें कि इन दोनों मंत्रियों को हटाने के लिए सीएम महबूबा लगातार मांग कर रही थीं और अब इन्होंने खुद ही इस्तीफा दे दिया था, जिस पर सरकार ने अब मंजूरी भी दे दी है.


दरअसल, दोनों मंत्रियों पर गैंगरेप के आरोपियों की तरफदारी का आरोप लग रहा था. श्रीनगर में शनिवार को राम माधव और बीजेपी नेताओं की बैठक के बाद ये इस्तीफे जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री को सौंप दिए. जिसके बाद विचार-विमर्श कर वन मंत्री लाल सिंह और उद्योग मंत्री चंदर प्रकाश गंगा का इस्तीफा मंजूर किया गया.


इससे पहले, कठुआ गैंगरेप केस में जम्मू-कश्मीर सरकार ने तीन आरोपी पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई की थी. तीनों पुलिसवालों को राज्य सरकार ने बर्खास्त कर दिया था. इस बीच मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने चीफ जस्टिस को खत लिखकर इस केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग भी की है.  


तीन पुलिसवालों पर गिरी गाज


दरअसल शुरुआती जांच के मुताबिक ये तीनों पुलिसवाले कठुआ की आठ साल की बच्ची के गैंगरेप और मर्डर केस में आरोपी थे. इन तीनों को बर्खास्त करने के साथ जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि इस मामले में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए देशभर से लोग जिस तरह से आगे आए उससे व्यवस्था में विश्वास बहाल होगा. साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि पीड़ित बच्ची को न्याय दिलाने में जम्मू-कश्मीर सरकार के साथ खड़े होने के लिए देश के नेतृत्व, न्यायपालिका, मीडिया और सिविल सोसाइटी की प्रशंसा की है.


तीनों पुलिसवालों पर गंभीर आरोप


महबूबा सरकार ने कठुआ मामले में आरोपी सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, हेड कॉन्स्टेबल तिलक राज और स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजुरिया को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है. शुरुआती पुलिसिया जांच के मुताबिक आनंद दत्ता और तिलक राज पर सबूत मिटाने का आरोप है. वहीं दीपक खजुरिया पर बच्ची के अपहरण, गैंगरेप और फिर हत्या में शामिल होने का गंभीर आरोप है.


बार एसोसिएशन का यूटर्न


इस बीच सीबीआई जांच की मांग को लेकर बार एसोसिएशन ने कैंडल मार्च निकाला. साथ ही बार एसोसिएशन कठुआ ने आठ साल की बच्ची के साथ बलात्कार और उसकी हत्या के मामले के आठ आरोपियों का मुफ्त में मुकदमा लड़ने का अपना प्रस्ताव वापस ले लिया. उसका यह फैसला उस वक्त आया है जब एक दिन पहले ही उच्चतम न्यायालय ने न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने की वकीलों की कोशिश पर गंभीरता से संज्ञान लिया था और कहा था कि इस तरह से बाधा डालने से न्याय व्यवस्था प्रभावित होती है.


बीते शुक्रवार को मामले का संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने कहा कि बार एसोसिएशनों का यह कर्तव्य है कि आरोपियों या पीड़ित परिवारों की पैरवी करने वाले वकीलों के काम में बाधा नहीं डाली जाए. बार अध्यक्ष कीर्ति भूषण ने कहा, 'हमने इस मामले में मुफ्त में मुकदमा लड़ने के प्रस्ताव को वापस ले लिया है. आरोपी किसी भी व्यक्ति की सेवा लेने और अदालत में अपना बचाव करने के अधिकार का इस्तेमाल करने को स्वतंत्र हैं.'


गौरतलब है कि कठुआ के पास एक गांव के मंदिर में रखकर बच्ची के साथ लगातार 7 दिनों तक गैंगरेप किया गया और फिर मामले को दबाने के लिए बच्ची को मार दिया गया था. यह वारदात 10 से 17 जनवरी के बीच की है.