मॉस्को/दमिश्क गृह युद्ध की आग में झुलसे सीरिया को अमेरिका और उसके सहयोगियों के हमले से बचाने के लिए रूस ने 18 महीने पहले ही प्लानिंग बना ली थी. लिहाजा अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के हमले से सीरिया को कोई खास नुकसान नहीं हुआ. इन देशों की ओर से सीरिया पर 103 मिसाइलें दागी गईं, जिनमें से सीरिया ने 71 मिसाइलों को सफलतापूर्वक मार गिराया.


अमेरिका द्वारा सीरिया पर केमिकल हमले के जवाब में किए गए हवाई हमले में किसी के मारे जाने की भी खबर नहीं है. हालांकि सीरिया के होम्स में तीन लोगों के घायल होने की बात कही जा रही है. शनिवार को रूसी जनरल स्टाफ के मुख्य ऑपरेशन्स डिपार्टमेंट के प्रमुख कर्नल जनरल सर्गेई रुडस्कोई ने कहा कि सीरिया ने अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन की क्रूज मिसाइलों को मार गिराने के लिए जिन एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया, उनमें S-125, S-200, बक क्वाड्रेट, ओसा एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं.


इन सीरियाई एयर डिफेंस सिस्टम को रूस की मदद से तैयार किया गया है. रूस पहले से ही जानता था कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश सीरिया पर हमला कर सकते हैं, जिसके चलते उसने सीरिया को एयर डिफेंस सिस्टम और हथियार मुहैया कराना शुरू कर दिया था. रूसी जनरल के मुताबिक रूस पिछले 18 महीने से सीरिया को एयर डिफेंस सिस्टम और हथियार उपलब्ध करा रहा है. साथ ही इसको लगातार जारी रखे हुए.


रूस की समाचार एजेंसी ताश ने रूसी जनरल रुडस्कोई के हवाले से बताया कि सीरिया पर अमेरिका ने  B-1B प्लेन से टॉमहॉक और GBU-38 गाइडेड बम दागे. साथ ही F-15 लड़ाकू विमान और F-16 लड़ाकू विमानों से हवा से जमीन में मार करने वाली मिसाइलें दागी गईं. इसके अलावा ब्रिटेन ने भी सीरिया पर टोरनाडो एयरक्राफ्ट से आठ Scalp EG मिसाइलें दागीं. इसका सीरिया ने भी कड़ा जवाब दिया और 103 में से 71 मिसाइलों को मार गिराया.


अमेरिका से निपटने को सीरिया को S-300 मिसाइल सिस्टम देगा रूस


अब रूस ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों से निपटने के लिए सीरिया को S-300 मिसाइल सिस्टम देने की तैयारी शुरू कर दी है. इससे सीरिया को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के हमले को विफल करने में मदद मिलेगी. इससे पहले रूस ने अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में कथित तौर पर सेंध लगातर डोनाल्ड ट्रंप को जितवाया था. इस चुनाव में डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को करारी हार का सामना करना पड़ा था. हालांकि बाद में अमेरिका ने रूस पर राष्ट्रपति चुनाव में दखल का आरोप लगा था और रूस के राजनयिकों को देश से निकाल दिया था.