नई दिल्ली। विनिवेश प्रक्रिया के बीच एयर इंडिया ने 2017-18 के दौरान राजस्व में 11 फीसद बढ़ोतरी के साथ 80 फीसद पैसेंजर लोड फैक्टर दर्ज की है। इससे एयर इंडिया बेचने की प्रक्रिया में सरकार की सौदेबाजी में क्षमता सुधर सकती है और खरीदार कंपनियों की क्षमता घट सकती है। लगातार दूसरे वर्ष बेहतर परिणामों के फलस्वरूप एयर इंडिया की कीमत बढ़ जाने से सरकार शायद ही बिक्री ज्ञापन की शर्तों में किसी तरह की ढील देगी।


एयर इंडिया के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर प्रदीप सिंह खरोला ने बृहस्पतिवार को कहा कि निष्पादन के मोर्चे पर एयर इंडिया लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है। इससे पहले 2016-17 में बेहतर परिणाम दर्शाते हुए 2015-16 के 20,610.33 करोड़ के मुकाबले 22,277.68 करोड़ का कुल राजस्व अर्जित किया था।


पिछले वर्ष एयर इंडिया के विनिवेश का सैद्धांतिक फैसला लेने और इस वर्ष 28 मार्च को इससे संबंधित प्राथमिक सूचना ज्ञापन जारी करने के बाद सरकार ने एयर इंडिया में विनिवेश की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है और अब इसके लिए उपयुक्त खरीदार का इंतजार किया जा रहा है। यह अलग बात है कि अभी तक किसी कंपनी या एयरलाइन ने विनिवेश के प्रति स्पष्ट रुचि नहीं दिखाई है। इंडिगो और टाटा-सिया जैसी जिन एयरलाइनो ने शुरू में उत्साह दिखाया था, वे भी अब पीछे हटती लग रही हैं। ऐसे में सरकार की आशा ब्रिटिश एयरवेज और लुफ्थांसा जैसी नई एयरलाइनों पर टिक गई है। हालांकि सभी एयरलाइनें चाहती हैं कि सरकार प्राथमिक सूचना ज्ञापन की शर्तो में ढील दे।

ज्ञापन में सरकार ने खरीदार कंपनी के समक्ष एयर इंडिया की 76 फीसद इक्विटी के साथ इसका आधा कर्ज वहन करने व 3 साल तक इसे किसी और को न बेचने की शर्त रखी है। खरीदार कंपनी को एयर इंडिया के साथ केवल एयर इंडिया एक्सप्रेस व एयर इंडिया सैट्स नामक सहायक इकाइयां प्राप्त होंगी। इच्छुक कंपनियों को ये सभी शर्ते भारी लग रही हैं और वे इनमें ढील का इंतजार कर रही हैं। निजी कंपनियों के इस रुख की विपक्षी दल कांग्रेस के अलावा एयर इंडिया यूनियनो ने भी आलोचना की है। इनका कहना है कि निजी कंपनियां अपने हथकंडों के जरिये सरकार पर एयर इंडिया की कीमत घटाने का दबाव बना रही हैं।


एयर इंडिया की यूनियन पहले से ही विनिवेश का विरोध कर रही हैं। उन्होंने एयर इंडिया के कार्य निष्पादन में सुधार की दलील देते हुए पिछले दिनों पीएम मोदी को पत्र लिखा था और विनिवेश प्रक्रिया को रद करने की मांग की थी। कांग्रेस के मनीष तिवारी ने पिछले दिनो कहा था कि निजी एयरलाइनें ऐसे प्रयास कर रही हैं ताकि सरकार एयर इंडिया को औने-पौने बेचने को बाध्य हो जाए।