बीपीसीएल, एचपीसीएल और आईओसी सहित सभी ऑइल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में बुधवार को 6-8 पर्सेंट की तेज गिरावट आई। इससे इन कंपनियों के शेयरों में पैसा लगाए बैठे निवेशकों की वेल्थ में 20,000 करोड़ रुपये तक की कमी आई है। दरअसल मीडिया में खबर आई थी कि इन कंपनियों को फ्यूल के दाम में एक रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी का बोझ उठाना पड़ेगा। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड के दाम में हो रही बढ़ोतरी के बीच फ्यूल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में कमी नहीं करने का फैसला किया है। इससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का मार्केटिंग मार्जिन घटेगा। फ्यूल स्टेशन पर लगने वाला दाम रिफाइनरी गेट प्राइस से जितना ज्यादा होता है ऑयल कंपनियों का मार्केटिंग मार्जिन उतना ही ज्यादा होता है। ऑयल कंपनियों के ऑपरेटिंग प्रॉफिट में आधे से ज्यादा हिस्सा मार्केटिंग मार्जिन का होता है।

आमतौर पर क्रूड ऑइल के दाम में हरेक डॉलर (प्रति बैरल) की बढ़ोतरी होने पर पेट्रोल और डीजल का दाम 40 से 50 पैसा प्रति लीटर बढ़ना चाहिए। अगर ऑइल मार्केटिंग कंपनियों को रिटेल फ्यूल प्राइस में 1 रुपये प्रति लीटर की कमी करने के लिए कहा जाता है तो उससे उनके मार्केटिंग रेवेन्यू में 10-14% तक और प्रॉफिट में 5-8% की कमी आएगी। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक, कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन में होने वाली हर 50 पैसे की कटौती से इनके अनुमानित ईपीएस में 12-21% तक की कमी होगी। मार्केटिंग मार्जिन में गिरावट से सबसे ज्यादा नुकसान एचपीसीएल को होगा क्योंकि उसके टोटल रेवेन्यू में मार्केटिंग रेवेन्यू का हिस्सा सबसे ज्यादा है। 


11 अप्रैल को पेट्रोल और डीजल पर ऑइल मार्केटिंग कंपनियों का मार्जिन दिसंबर 2017 के ~1 प्रति लीटर से कम के रेट से उछलकर क्रमश: ~3.1 और ~3.3 प्रति लीटर हो गया था। दरअसल, इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड के दाम में जितनी उछाल आई थी, उससे कहीं ज्यादा बढ़ोतरी रिटेल फ्यूल प्राइस में हुई थी। पिछले 20 दिनों में पेट्रोल ~1.79 और डीजल ~2.25 प्रति लीटर महंगा हो चुका है। PPAC के डेटा के मुताबिक, इंडियन क्रूड बास्केट के दाम में मार्च के दौरान $0.26 प्रति बैरल की बढ़ोतरी हुई थी। ऑयल कंपनियों का मौजूदा ग्रॉस मार्केटिंग मार्जिन ~2.5 प्रति लीटर के लॉन्ग टर्म एवरेज से ज्यादा हो गया है इसलिए सरकार के फैसले से उनके प्रॉफिट मार्जिन पर तुरंत असर नहीं होगा। हालांकि अगर क्रूड का दाम निकट भविष्य में लगातार बढ़ता रहता है तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को बड़ा नुकसान होगा। 


इस साल कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से फ्यूल प्राइस हाइक पर कुछ समय के लिए रोक के आसार को देखते हुए स्टॉक मार्केट में पिछले छह महीनों में ऑइल मार्केटिंग कंपनियों का परफॉर्मेंस बीएसई सेंसेक्स के मुकाबले 19-30% तक कमजोर रहा है। ऑयल कंपनियों में फिलहाल हिस्टोरिकल एवरेज से 15-25% डिस्काउंट पर ट्रेड हो रहा है जबकि ग्लोबल कॉम्पिटिटर्स का डिस्काउंट 10-20% चल रहा है।