प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में विपक्षी पार्टियों के हंगामे के विरोध स्वरूप 12 अप्रैल को दिन भर के उपवास पर बैठेंगे. वहीं इस दिन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह कर्नाटक के हुबली में सांकेतिक धरने पर बैठेंगे, जबकि बीजेपी के सभी अन्य सांसद देश के विभिन्न हिस्सों में उपवास करेंगे.


सूत्रों ने बताया कि उपवास रखने के दौरान मोदी लोगों और अधिकारियों से मिलने और फाइलों को मंजूरी देने के अपने दैनिक नियमित आधिकारिक कामकाज में कोई बदलाव नहीं करेंगे.


कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित पार्टी के कई नेता एक दिन पहले ही राजघाट पर सांकेतिक उपवास पर बैठे थे. ऐसे में बीजेपी के इस कदम को विपक्षी कांग्रेस के जवाब के रूप में देखा जा रहा है.


बीजेपी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने बताया कि उपवास का आइडिया प्रधानमंत्री मोदी ने ही रखा था. उन्होंने बताया कि संसद में व्यवधान से हुए नुकसान को लेकर उनकी पार्टी चिंतित हैं और उनकी कोशिश पूरे देश को इससे अवगत कराना है.



इसके साथ ही उन्होंने कहा, 'यही कारण है कि एनडीए के सभी सांसदों ने संसद के बजट सत्र के 23 दिनों की अपनी सैलरी छोड़ने का फैसला किया है.'


प्रधानमंत्री नहीं लेंगे बजट सत्र की सैलरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 मार्च से अब तक चले बजट सत्र का वेतन नहीं लेंगे. यह रकम 79,752 रुपए के करीब है. पीएम मोदी इससे पहले भाजपा सांसदों से संसद में जारी गतिरोध और विपक्ष के हंगामे के चलते काम न होने पर वेतन छोड़ने को कहा था.


अनंत कुमार ने भी छोड़ा वेतन

केन्द्रीय मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि सत्तारूढ़ राजग के सांसद वर्तमान बजट सत्र के उन 23 दिन का वेतन नही लेंगे जब कांग्रेस व अन्य राजनीतिक दलों के विरोध प्रदर्शन के कारण संसद की कार्यवाही नहीं चल सकी. कुमार ने संसद के दोनों सदनों में हंगामे के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि वह ‘लोकतंत्र विरोधी’ राजनीति कर रही है.


बता दें कि इस साल का बजट सत्र काफी हंगामेदार रहा था और प्रोडक्टिवी के लिहाज से यह पिछले 8 वर्षों के इतिहास में सबसे खराब सत्र रहा. इस दौरान बीजेपी ने कांग्रेस पर दोनों सदनों में व्यवधान पैदा कर अहम बिल को अटकाने का आरोप लगाया था.


कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में उनकी पार्टी के कई नेता देश में हो रहे कथित दलित उत्पीड़न और सांप्रदायिक हिंसा सहित विभिन्न मुद्दे के विरोध में सोमवार को उपवास पर बैठे थे. हालांकि कांग्रेस का यह उपवास कई विवादों की वजह से सुर्खियों में रहा था. इस दौरान राहुल के साथ उपवास रखने राजघाट पहुंचे जगदीश टाइटलर को वहां पार्टी नेताओं का ही विरोध झेलना पड़ा, वहीं उपवास से पहले दिल्ली कांग्रेस के नेता अजय माकन और अरविंदर सिंह लवली की छोले-भटूरे खाते तस्वीर को लेकर भी कई सवाल उठे थे.